नई दिल्ली: देश के किसानों के हित में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक सरहानीय कदम उठाया है। बता दें कि गुरुवार को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पाद 'किसान रेल' के माध्यम से देश के कोने-कोने से बड़े बाजारों में पहुंचेंगे और किसानों को उनकी उपज का अच्छा भाव मिलेगा। रेलमंत्री यहां भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की 91वीं सालाना आम बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने देश में कृषि क्षेत्र के विकास में आईसीएआर के वैज्ञानिकों व अनुसंधानकर्ताओं के योगदान की सराहना की। पुराने रेल कोच को बना दिया होटल, अब हो रही तगड़ी कमाई ये भी पढ़ें
मौके पर उन्होंने कहा कि ऐसे समाधान व सुझाव देने की अपील की, जिससे देश के कोने-कोने से ताजा फल, सब्जी समेत जल्दी खराब होने वाले अन्य उत्पादों को किसान रेल के जरिए देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सके। वहीं मंत्री ने आईसीएआर के वैज्ञानिकों से ऐसे समाधान विकसित करने को कहा, जिससे किसानों की खेती की लागत कम हो और उन्हें फसलों का अच्छा दाम मिले, जिससे 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
इससे पहले, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खाद्यान के मामले में देश में आवश्यकता से अधिक उत्पादन होने और लगातार इस मामले में नया रिकॉर्ड कायम करने में आईसीएआर अनुसंधानों के योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि आईसीएआर लगातार देश के कृषि क्षेत्र की उन्नति के लिए काम कर रहा है। तोमर ने भी किसानों की आदमनी 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य का हासिल करने में आईसीएआर के योगदान की जरूरत बताई और कहा कि किसानों की उत्पादन लागत कम करके पैदावार बढ़ाने और फसल के उचित व लाभकारी दाम मिलने से ही उनकी आमदनी में इजाफा होगा।
इस मौके पर केंद्रीय सांख्यिकी, कार्यक्रम कार्यान्वयन एवं योजना राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार राव इंद्रजीत सिंह ने आईसीएआर के वैज्ञानिकों से पानी की अधिक खपत वाली फसलों के बजाय कम पानी की खपत वाली फसलों की खेती लाभकारी बनाने की दिशा में काम करने की अपील की। वहीं हीं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि देश को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में कृषि एवं संबंधित क्षेत्र की अहम भूमिका होगी। लिहाजा, खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है, जिसमें आईसीएआर का अहम योगदान है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अगले पांच साल में देश को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है।
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