नयी दिल्ली। पिछले साल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 6 करोड़ से अधिक सदस्यों को तब चिंता होने लगी जब उसने 8.5 प्रतिशत ब्याज भुगतान में देरी की। जबकि 8.5 फीसदी पीएफ ब्याज का ऐलान 2020 में काफी पहले ही कर दिया गया था। ब्याज का भुगतान कैसे और कितनी किस्तों में किया जाएगा, इसमें काफी समय खर्च हुआ। मगर आखिर में ईपीएफओ ने 31 दिसंबर 2020 को सदस्यों के ईपीएफओ खातों ब्याज का पैसा जमा करना शुरू किया। साथ ही ईपीएफओ ने एक ही बार में पूरी ब्याज राशि की पेमेंट करने की भी बात कही। मगर इसे 8.5 प्रतिशत ब्याज अदा करने के लिए अपना 3,000 करोड़ रुपये का ईटीएफ निवेश बेचना पड़ा। सदस्यों को ब्याज देने में देरी क्यों हुई, इसके बारे में जानते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सदस्यों की हर महीने कटने वाली पीएफ राशि को ईपीएफओ संभालता है। वो इस पैसे को अलग-अलग जगहों पर निवेश करता है। इस निवेश से उसे रिटर्न और डेब्ट उपकरणों से ब्याज मिलता है। इसी पैसे से वो सदस्यों को ब्याज अदा करता है। ईपीएफओ द्वारा पैसे को अलग-अलग जगह निवेश करना अच्छा माना जाता है। मगर इसके फंड के चुनाव पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
जुलाई 2015 से ईपीएफओ ने इक्विटी में फंड का एक हिस्सा निवेश करना शुरू किया। शुरुआत में सदस्यों के नये पैसे में से 5 फीसदी को तीन एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश करने का फैसला लिया, जिनमें एसबीआई-ईटीएफ निफ्टी 50, यूटीआई निफ्टी ईटीएफ और यूटीआई सेंसेक्स ईटीएफ शामिल हैं। फिर इसने इक्विटी में अधिक पैसा लगाना शुरू किया। 2017 तक ये राशि 15 फीसदी पर आ गयी।
इसके साथ ही ईपीएफओ ने दो अन्य ईटीएफ में निवेश करने का भी फैसला किया, जिन्हें सरकार के विनिवेश (सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेच कर पैसा जुटाना) लक्ष्य को पूरा करने में मदद करने के लिए बनाया गया है। इनमें सीपीएसई ईटीएफ (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज) और भारत 22 ईटीएफ शामिल हैं। सीपीएसई ईटीएफ और भारत 22 ईटीएफ में निवेश करने का निर्णय सही नहीं रही। पिछले 3 वर्ष की अवधि में दोनों योजनाओं में नुकसान हुआ है। 2020 में भारत 22 और सीपीएसई ईटीएफ ने क्रमशः 8 प्रतिशत और 14 प्रतिशत पैसा डुबा दिया। जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 15 फीसदी तक ऊपर चढ़ा।
बाजार विशेषज्ञ इक्विटी में निवेश करने के ईपीएफओ के फैसले को सही मानते हैं। मगर ईपीएफओ का सीपीएसई ईटीएफ और भारत-22 ईटीएफ में निवेश करने का फैसला सही नहीं माना जा रहा है। कई सालों से सरकारी कंपनियों के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। सीपीएसई ईटीएफ के अधिकांश शेयर जैसे कि ओएनजीसी, कोल इंडिया, एनटीपीसी और इसी तरह के अन्य शेयरों ने खराब या निगेटिव रिटर्न दिए हैं।
भारत 22 ईटीएफ में कुछ ब्लू-चिप शेयर हैं, जिनमें एक्सिस बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और आईटीसी शामिल हैं। मगर जानकार कहते हैं कि इन कंपनियों के साथ-साथ खराब परफॉर्मेंस करने वाली सरकारी कंपनियों में (भारत 22 ईटीएफ) निवेश करने से आपके कुल रिटर्न में गिरावट आएगी। असल में ईपीएफओ के प्रतिद्वंद्वी नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस), जिसे पेंशन फंड रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (पीएफआरडीए) संभालता है, ने हाई रिटर्न दिया है। पिछले पांच साल की अवधि में यहां से निवेशकों को 13-15 प्रतिशत रिटर्न मिला है।
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