26 अप्रैल को भारतीय तेल उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह स्थिरता तब देखी जा रही है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से कई देशों के लिए एनर्जी कॉस्ट बढ़ती जा रही है, लेकिन घरेलू तेल कंपनियों ने फिलहाल मौजूदा दरों को ही बरकरार रखने का फैसला किया है।

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कीमतों को स्थिर रखने के फैसले से आम लोगों को अपना डेली ट्रैवल बजट मैनेज करने में मदद मिल रही है। हालांकि, बड़ी तेल कंपनियों के लिए स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर होने की वजह से लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर बढ़ गया है। इस अंतर को 'अंडर-रिकवरी' कहा जाता है, जिसका असर कंपनियों की आने वाली वित्तीय रिपोर्टों पर पड़ सकता है।

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26 अप्रैल: देश के महानगरों में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

भारत के प्रमुख शहरों में आज ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली और मुंबई के निवासियों को आज भी कल वाले रेट पर ही पेट्रोल-डीजल मिल रहा है। बता दें कि ईंधन की ये कीमतें सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजों और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई लागत को प्रभावित करती हैं। वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में स्थिर कीमतें कारोबारियों के लिए भी एक बड़ी राहत हैं।

शहरपेट्रोल की कीमत (INR)डीजल की कीमत (INR)
नई दिल्ली94.7287.62
मुंबई104.2192.15
कोलकाता103.9490.76
चेन्नई100.7592.34

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव

मार्केट एक्सपर्ट्स इस बात पर करीब से नजर रख रहे हैं कि ये कीमतें कब तक स्थिर रह पाएंगी। तेल की बढ़ती लागत अक्सर ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बिल बढ़ा देती है। अगर कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहे, तो भारत में रिटेल महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक (RBI) को ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

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फिलहाल, सरकार और तेल कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही हैं। इस रणनीति का मकसद आम जनता को बाजार के उतार-चढ़ाव और कीमतों के अचानक लगने वाले झटकों से बचाना है। इस हफ्ते पश्चिम एशिया से मिलने वाले वैश्विक संकेतों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। अगर कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है, तो घरेलू कीमतों की समीक्षा की जा सकती है।