बाजार में बढ़ती आशंकाओं के बीच 23 अप्रैल को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी रहीं। आज देश के प्रमुख महानगरों में ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। हालांकि, लोकसभा चुनाव के बाद कीमतों में भारी बढ़ोतरी की अफवाहें काफी तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार ने इन दावों पर तुरंत सफाई देते हुए कहा है कि फिलहाल दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

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अधिकारियों के मुताबिक, इंटरनल प्राइसिंग मॉडल को देखते हुए जनता का घबराना बेबुनियाद है। उन्होंने साफ किया कि सरकारी तेल कंपनियां लंबी अवधि के मार्केट ट्रेंड्स के आधार पर रेट तय करती हैं। सरकार के इस बयान का मकसद उन ग्राहकों की चिंता दूर करना है, जिन्हें जल्द ही बड़ी बढ़ोतरी का डर सता रहा है। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का अब भी मानना है कि ग्लोबल क्रूड मार्केट में हो रहे बदलावों के चलते आगे चलकर कीमतों में सुधार करना पड़ सकता है।

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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की अफवाहों का क्या है सच?

इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। इतनी ऊंची कीमतों की वजह से तेल मार्केटिंग कंपनियों के मुनाफे पर भारी दबाव पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि कंपनियां फिलहाल हर लीटर की बिक्री पर घाटा उठा रही हैं। इस घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में 5 से 10 रुपये तक की बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।

शहरपेट्रोल की कीमत (₹)डीजल की कीमत (₹)
नई दिल्ली94.7287.62
मुंबई104.2192.15
कोलकाता103.9490.76
चेन्नई100.7592.34

ग्लोबल क्रूड का हाल और चुनाव के बाद क्या होंगे रेट?

अक्सर देखा गया है कि चुनाव के दौरान जनता के मूड को ध्यान में रखते हुए तेल की कीमतें स्थिर रखी जाती हैं। पुराने आंकड़े गवाह हैं कि आखिरी दौर की वोटिंग खत्म होने के बाद अक्सर रेट्स में बदलाव किया जाता है। अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो देशभर में आम आदमी के घर का बजट बिगड़ना तय है। फिलहाल, सरकार का यही कहना है कि आम नागरिकों के लिए तेल बाजार पूरी तरह स्थिर बना हुआ है।

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आने वाले हफ्तों में भारतीय वाहन चालकों को अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट पर पैनी नजर रखनी होगी। भले ही अभी रेट्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर अब भी बना हुआ है। सरकार के खंडन से करोड़ों वाहन मालिकों को फिलहाल तो राहत मिली है, लेकिन भविष्य में कीमतें कितनी स्थिर रहेंगी, यह ग्लोबल टेंशन और कच्चे तेल की सप्लाई पर निर्भर करेगा।