नयी दिल्ली। कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए मार्च में लॉकडाउन की शुरुआत की गई थी। इससे देश में फ्यूल यानी पेट्रोल-डीजल की मांग में भारी गिरावट आई थी। अनलॉकडाउन की शुरुआत के बाद फ्यूल की मांग फिर से पटरी पर लौट रही है। मगर इसके लॉकडाउन से पहले के स्तरों पर लौटने में 6 से 9 महीनों का समय लग सकता है। कोरोनोवायरस संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन की शुरुआत के बाद अप्रैल में फ्यूल सेल्स में 45.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी। मई की शुरुआत में लॉकडाउन में ढील दी गई। मगर इस समय कई राज्य रिकॉर्ड दैनिक संक्रमण दर (कोरोना के रोजाना सामने आ रहे रिकॉर्ड मामलों) की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लगा रहे हैं।

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स्थिति सामान्य होने में लगेगा वक्त

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार इंडियन ऑयल कॉर्प (आईओसी) के डायरेक्टर-फाइनेंस एस. के. गुप्ता के अनुसार स्थिति सामान्य होने में 6 से 9 महीनों का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और दुनिया भर में बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए डिमांड रिकवरी रेट का अनुमान लगाना कठिन रहा। मई में एक बेहतर रिकवरी करने के बाद जून के दूसरे हिस्से में फ्यूल की बिक्री कम हो गई।

कितनी घटी पेट्रोल-डीजल की सेल्स

पीएसयू (सरकारी कंपनियां) बिक्री के आंकड़ों के अनुसार डीजल, जिसका भारत में कुल पेट्रोलियम उत्पाद की मांग का 40 फीसदी हिस्सा है, की सेल्स जून के मुकाबले जुलाई में 13 प्रतिशत गिर कर 48.5 लाख टन पर आ गई। पिछले साल की तुलना में ये 21 प्रतिशत कम रही। जून के मुकाबले जुलाई में पेट्रोल की बिक्री 1 प्रतिशत घटकर 20.3 लाख टन रही और एक साल पहले के मुकाबले ये लगभग 11.5 प्रतिशत कम रही। जुलाई में जेट ईंधन की बिक्री पिछले महीने के मुकाबले 4 प्रतिशत बढ़कर लगभग 218,000 टन हो गईय़ लेकिन जुलाई 2019 के मुकाबले ये 65 प्रतिशत कम है। इकलौता ईंधन जिसकी मांग लगातार बढ़ी है वह रसोई गैस है। जुलाई में इसकी सेल्स 22.7 लाख टन रही, जो जून की तुलना में 10 प्रतिशत और एक साल पहले की बिक्री की तुलना में 3.5 प्रतिशत अधिक रही।

राज्यों में लग रहा लॉकडाउन

पिछले हफ्ते आईओसी के अध्यक्ष श्रीकांत माधव वैद्य ने कहा था कि मांग साल के अंत तक ही पटरी पर आ पाएगी। लॉकडाउन लगाने वालों राज्यों की संख्या बढ़ रही है और इसका मांग पर पड़ रहा है। वैद्य के अनुसार एक बात निश्चित है कि निकट भविष्य में कम से कम सामान्य स्थिति वापस नहीं आने वाली। नए लॉकडाउन देश के आर्थिक सुधार को रोक रहे हैं क्योंकि संक्रमण की दर धीमी होने के कोई संकेत नहीं हैं। रोजाना कोरोना के रिकॉर्ड मामले सामने आ रहे हैं। आईओसी वित्त वर्ष 2020-21 (अप्रैल 2020 से मार्च 2021) में 26,233 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करने की योजना है। इसमें से लगभग 4,200 करोड़ रुपये रिफाइनरी अपग्रेड और पाइपलाइनों पर खर्च होगा। 5,000 करोड़ रुपये मार्केटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर और 2,200 करोड़ रुपये पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट्स पर खर्च होंगे। इसके अलावा 5,000 करोड़ रुपये समूह कंपनियों पर खर्च करने की योजना है।