नयी दिल्ली। योगगुरु बाबा रामदेव की पतंजलि ने कहा है कि इसे कर्ज से दबी रुचि सोया को खरीदने के लिए 3,200 करोड़ रुपये का लोन मिल गया है। पतंजलि ने रुचि सोया को दिवालिया प्रक्रिया के माध्यम से खरीदने के लिए 3,200 करोड़ रुपये के कर्ज के लिए करार कर लिया है। गौरतलब है कि सितंबर में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल या एनसीएलटी ने कर्ज में डूबी रुचि सोया को खरीदने के लिए पतंजलि आयुर्वेद की रेजोल्यूशन योजना को मंजूरी दे दी थी। रुचि सोया को खरीदने के लिए पंतजलि को कर्ज की जरूरत थी और अब इसके मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने कहा है कि एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से पतंजलि को जरूरत के मुताबिक लोन मिल गया है। रुचि सोया दिसंबर 2017 में दिवालिया हो गयी थी। आपको बता दें कि रुचि सोया पर करीब 12,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। रुचि सोया के कई मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट हैं।

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किस-किस बैंक ने दिया कर्ज
पतंजलि को जिन बैंकों ने कर्ज दिया है उनमें एसबीआई के अलावा पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडियास सिंडिकेट बैंक और इलाहाबाद बैंक शामिल हैं। इन बैंकों में से पतंजलि को एसबीआई से 1,200 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक से 700 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 600 करोड़ रुपये, सिंडिकेट बैंक से 400 करोड़ रुपये और इलाहाबाद बैंक से 300 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है। पतंजलि रुचि सोया में इक्विटी के रूप में 204.75 करोड़ रुपये और 3,233.36 करोड़ रुपये डेब्ट के रूप में डालेगी। इस बात की जानकारी खुद रुचि सोया ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल को दी थी।

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क्यों दिवालिया हुई रुचि सोया
एनसीएलटी ने दो प्रमुख फाइनेंशिल लेंडर्स स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और डीबीएस बैंक द्वारा दायर की गयी दिवाला याचिका को स्वीकार कर लिया था। हालांकि बाद में सिंगापुर स्थित डीबीएस बैंक ने असंतुष्टी जाहिर करते हुए नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख किया। डीबीएस बैंक ने बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद द्वारा रुचि सोया के लिए लगायी बोली से मिलने वाली राशि के वितरण को चुनौती देने के लिए नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था।

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