नयी दिल्ली। संसद ने मंगलवार को कंपनी अधिनियम में और संशोधन करने के लिए एक विधेयक पारित कर दिया। इस विधेयक से देश में व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बहुत से मामलों को अब इस विधेयक के जरिए अपराध की कैटेगरी से बाहर कर दिया गया है। आठ सदस्यों के निलंबन के विरोध में कई विपक्षी सांसदों द्वारा सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किए जाने के बीच कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2020 को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया। लोकसभा ने 19 सितंबर को विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी।

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कई मामले अपराध की श्रेणी से बाहर
कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2020 से कई पेनल प्रोविजन अपराध की कैटेगरी से बाहर (Decriminalise) होंगे। साथ ही भारतीय कॉर्पोरेट्स को विदेशों में डायरेक्ट लिस्टिंग की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा कानून में निर्माता संगठनों से संबंधित एक नया अध्याय पेश होगा। इस नए विधेयक से जो बदलाव होंग उनमें कुछ अपराधों के लिए जुर्माने में कमी, राइट्स इश्यू के लिए टाइमलाइन, सीएसआर अनुपालन आवश्यकताओं में छूट और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अलग बेंचों की स्थापना शामिल है।

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इन लोगों के लिए रहेगी सख्ती
बिल पर बोलते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जोर दिया कि फ्रॉड, धोखाधड़ी और सार्वजनिक हितों को नुकसान पहुंचाने वालों के साथ मजबूती से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के लगभग 48 खंडों में विभिन्न अपराधों को कम करने के लिए संशोधन किया जा रहा है। सीतारमण ने कहा कि कंपनी अधिनियम के तहत 2013 में 134 की तुलना में वर्तमान में लगभग 124 दंड प्रावधान हैं। राज्यसभा में संक्षिप्त चर्चा के बाद विधेयक पर वित्त मंत्री ने कहा कि कंपनी अधिनियम 2013 में कई मामले हैं इसीलिए सरकार संसद में इस कानून के लिए संशोधन लाती रहती है। उनके अनुसार हितधारक इनपुट देते रहते हैं क्योंकि ये कानून अभी भी उनकी मदद नहीं कर रहा और वे अनुपालन से जुड़े हुए मामलों का सामना कर रहे हैं।

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