नयी दिल्ली। प्याज पर चल रही उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। अभी तक प्याज के चढ़े हुए दामों से आम जनता परेशान थी। सरकार ने आयात बढ़ा कर कीमतों को काबू में करने के लिए कदम उठाये। नतीजे में प्याज की कीमतें घट तो रही हैं, मगर आयातित प्याज से अब किसान चिंता में आ गये हैं। किसानों का कहना है कि विदेशों से प्याज के ज्यादा आयात से खेतों से प्याज की आवक प्रभावित होगी। असल वजह यह है कि बढ़ते दामों को देखते हुए किसानों ने समय से पहले खेतों से प्याज निकालना शुरू कर दी। यह प्याज दिसंबर के आखरी और जनवरी के पहले हफ्ते में बाजार में पहुँच जायेगी। अब किसानों का कहना है कि विदेशों से आ रही प्याज के चलते उन्हें उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पायेगा। बता दें कि आपूर्ति कमी की वजह से प्याज के दाम 200 रुपये से भी अधिक तक पहुँच गये थे।

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कम पैदावार का अनुमान
सरकार की तरफ से संसद में बताया गया कि 69.9 लाख टन प्याज के उत्पादन का अनुमान था, मगर मॉनसून और बाढ़ के कारण अब 53.73 लाख टन प्याज की पैदावार का अनुमान है। सरकार उत्पादन में कमी को पूरा करने के लिए आयात कर रही है। विदेशों से मंगायी जा रही प्याज के कारण 200 रुपये से ऊपर पहुँच चुकी प्याज के दाम धीरे-धीरे अब नीचे जा रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिस्र, अफ्गानिस्तान और और तुर्की से प्याज मंगायी जा रही है। सरकार ने 12,660 टन प्याज मंगाने के लिए सौदे किये हैं।

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क्या है किसानों की असल चिंता
किसानों की असल चिंता है विदेशी प्याज के बाजार में पहुँचने से सरकार का भंडार पूरा हो जायेगा और उस स्थिति में उन्हें अपनी प्याज का बेहतर खरीदार नहीं मिलेगा। किसानों के मुताबिक विदेशी प्याज उनके लिए कारोबारी लिहाज से नुकसानदेह हो सकती है। साथ ही किसान प्याज के निर्यात पर बैन हटाने की भी मांग कर रहे हैं। दरअसल सरकार ने देश में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए फरवरी तक प्याज के निर्यात पर रोक लगा रखी है।

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