देश में महंगाई अपनी चरम सीमा पर है. पिछले कुछ दिनों से सब्जियों के दाम लगातर बढ़ते जा रहे हैं. इसका सबसे ज्यादा असर आम आदमी को पड़ रहा है. प्याज के दाम लगातर बढ़ रहे हैं. चलिए जानते हैं कि ये सब्जियों के दाम लगातर क्यो बढ़ रहे हैं?

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एक रिपोर्ट के मुताबिक 6 नवंबर के दिन मंडी में प्याज का दाम अपनी चरम सीमा में पहुंच गया था. वहीं ऐसा कहा जा रहा है कि प्याज की कीमत में जल्द राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है.

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अगर बाकी सब्जी जैसे लोकी, टमाटर, गोभी की बात करें तो इनमें थोड़ी राहत देखने को मिली है. नवंबर में बहुत से सब्जियों के दाम कम हो गए हैं.

क्यों बढ़ें थे सब्जियों के दाम?

अगस्त और सितंबर के दिन भारी बारिश हुई थी. भारी बारिश के चलते फसले खराब भी हुई थी. इस बारिश का असर कहीं ना कहीं मंडी में भी देखने को मिला था. इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक भारी बारिश के चलते आपूर्ति में कमी आई.

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सप्लाई कम होने की वजह से अगस्त और सितंबर में सब्जियों के दाम में लगातर बढ़त आई है. इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक इन दोनों महीने में 28 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर टमाटर में देखने को मिला था.

अक्टूबर के समय टमाटर की कीमत में 49 फीसदी ज्यादा बढ़त देखने को मिली थी.

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पांच सालो में उच्चतम स्तर पर पहुंची प्याज की कीमत

6 नवंबर के दिन कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) के तहत प्याज की औसत थोक कीमत 5,656 रुपये प्रति क्विटल थी. ये कीमत 5 सालों में सबसे अधिक रही है. ऐसा इससे पहले 10 दिसंबर 2019 को ही हुआ था. लासलगांव APMC के तहत प्याज की न्यूनतम कीमत 3,951 रुपये थी. वहीं अधिकतम कीमत 5,656 रुपये प्रति क्विटल रही थी.

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खुदरा महंगाई पर पड़ रहा है भारी असर

ये भी देखा गया है कि बढ़ते सब्जियों की कीमत का असर खुदरा महंगाई पर भी देखने को मिला है. अक्टूबर में भारत की खुदरा महंगाई दर 6.21 फीसदी रहा है. ये पिछले 14 महीनों में सबसे ज्यादा था.