नयी दिल्ली। हर साल की तरह इस बार भी साल के आखिरी हिस्से में प्याज के दाम ऊपर चढ़े हुए हैं। किचन का बजट बिगाड़ने के मामले में आलू भी पीछे नहीं है। बताया जा रहा है कि प्याज के दिसंबर तक सामान्य नहीं होंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में इस समय प्याज का थोक रेट 15 से 47.50 रु प्रति किलो तक है, जबकि रिटेल में इसे 50-70 रु प्रति किलो के रेट पर बेचा जा रहा है। असल में राजस्थान से स्थानीय प्याज की सप्लाई अच्छी हो रही है, मगर विदेशों से आयात कम हो गया, जिसका प्याज की कीमतों पर असर पड़ा। इसी कारण प्याज के दाम दिसंबर से पहले सामान्य होने की संभावना नहीं है।
प्याज के दाम भले ही सामान्य नहीं है, मगर सरकार के कुछ उपायों से इन्हें काबू रखने में मदद मिली है। प्याज के बढ़त दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सितंबर के मध्य में प्याज का निर्यात रोक दिया था। इसके बाद व्यापारियों के लिए प्याज की स्टॉक लिमिट तय कर दी गई, जो कि दिसंबर 2020 तक जारी रहेगी। सरकार ने प्याज के दामों में और नरमी लाने के लिए आयात नियमों में भी राहत दी।
इस समय दिल्ली में आलू रिटेल में 50 रु प्रति किलो के रेट पर बिक रहा है। इतने अधिक रेट तब हैं जबकि उत्पादन बढ़िया और पर्याप्त है। आलू कोल्ड स्टोरेज में पहले से था। जबकि नई आवक भी शुरू हो गई है। इससे आलू के भाव कुछ कम तो हुए हैं, मगर सामान्य नहीं हैं। बता दें कि केंद्र सरकार के ऑनलाइन मार्केट ई-नाम (E-NAM) पर आलू का थोक भाव प्रति क्विंटल 3200 रु देखा गया। वहीं आगरा में 2100 रुपये प्रति क्विंटल, मेरठ और प्रयागराज में प्रति 2400 रु क्विंटल, सहारनपुर में 2600 रु प्रति क्विंटल और उन्नाव में 2693 रु प्रति क्विंटल तक है।
भारत में आलू की खपत 5 करोड़ टन के आस-पास है। अच्छी बात ये है कि भारत में खपत पूरा करने लायक आलू पैदा होता है। इसलिए करीब 10 सालों में आलू की कीमतों के इतनी ऊपर जाने से जानकार भी हैरान हैं। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार के आलू और प्याज को आवश्यक चीजों की लिस्ट से हटाने के बाद जमाखोरी हुई है। किसानों के मुकाबले व्यापारी कमाई कर रहे हैं। जानकार प्याज की तरह आलू पर भी स्टॉक लिमिट लगाने की बात कहते हैं।
भारत में आलू की अच्छी खासी पैदावार होती है। बता दें कि इस बार उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा यानी 214.25 लाख टन आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखने का फैसला लिया गया। वहीं जनवरी-जून के दौरान भारत ने 1.47 टन आलू का निर्यात किया। इससे भारत को 263 करोड़ रु हासिल हुए। वहीं पिछले पूरे साल में भारत ने 4.33 टन आलू का निर्यात किया गया था। इससे भारत को 547.14 करोड़ रु मिले थे।
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