नई दिल्ली, जुलाई 26। इस समय जापान की राजधानी टोक्यो में ओलम्पिक खेल 2020 चल रहे हैं। ओलम्पिक खेलों में विजेताओं को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल दिए जाते हैं। इस बार के ओलम्पिक खेलों में जो मेडल खेलों में जीत हासिल करने वाले विजेताओं को दिए जा रहे हैं, उनमें एक खास बात है। खास बात यह है कि इन्हें पुराने और खराब मोबाइल और लैपटॉप से तैयार किया गया है। स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत टोक्यो खेलों में दिए जा रहे ओलम्पिक मेडलों को तैयार करने के लिए स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे पुराने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को रीसाइकिल किया गया।
जापान के लोगों के लिए, इस परियोजना ने खेलों का हिस्सा बनने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया। टोयको 2020 के प्रवक्ता हितोमी कामिजावा के अनुसार इस अभियान के तहत जनता से प्रोजेक्ट के लिए पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को दान करने को कहा गया था। उन्होंने अपने इसमें हिस्सा लेने वाले लोगों का आभार जताया।
ये प्रोजेक्ट इस तथ्य पर आधारित था कि अरबों कीमती धातुएं जैसे सोना और चांदी, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग की जाती हैं, हर साल बड़ी तादाद में लोग इन्हें डम्प कर देते हैं। लोग यह सुनिश्चित करने के बजाय कि उनके गैजेट्स को ठीक से कलेक्ट और रीसाइकिल किया जाए, वे बस अपने गैजेट्स को डम्प या जला देते हैं। इसी का फायदा टोक्यो में हो रहे आयोजन के लिए मेडल तैयार करने में लिया गया।
2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए लगभग 5,000 कांस्य, रजत और स्वर्ण पदक को तैयार करने के लिए पर्याप्त रिसाइकिल कलेक्ट करने के लिए जापान में दो साल का समय लगा। ये एक राष्ट्रीय प्रयास था। 90% तक जापानी शहरों, कस्बों और गांवों ने दान किया। सैकड़ों-हजारों जापानी नागरिकों ने अपने पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को दान किया।
रीसाइक्लिंग अभियान ने 70 पाउंड (32 किलोग्राम) सोना, 7,700 पाउंड चांदी और 4,850 पाउंड कांस्य का उत्पादन किया। कमिजावा ने कहा कि ये सब करीब 80 टन पुराने फोन और लैपटॉप जैसे उपकरणों से हासिल हुए। सुनने में इतनी बड़ी परियोजना को पूरा करना आसान लग सकता है, मगर इसमें देश की राष्ट्रीय सरकार, हजारों नगर पालिकाओं, कंपनियों, स्कूलों और अन्य स्थानीय समुदायों को शामिल होना पड़ा।
जब परियोजना अप्रैल 2017 में शुरू की गई थी, तब बोर्ड में लगभग 600 नगरपालिकाएं थीं। मार्च 2019 में परियोजना के अंत तक, यह आंकड़ा बढ़कर 1,600 से अधिक हो गया था। ये एक प्रमुख जनसंपर्क अभियान था, और लोगों के लिए योगदान करना आसान बनाने के लिए कलेक्टिंग पॉइंट स्थापित किए गए थे। रियो 2016 ओलंपिक खेलों में, स्वर्ण और रजत पदक बनाने के लिए 30% स्टर्लिंग चांदी के लि कार के पुर्जों और मिरर सर्फेसेस जैसे रीसाइकिल्ड मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया था। 2024 में पेरिस खेलों को देखते हुए, जहां सोशल चेंज और पर्यावरण को बेहतर बनाना मुख्य विषयों में से हैं, ऐसी उम्मीद है कि टोक्यो 2020 मेडल प्रोजेक्ट एक मिसाल कायम करेगा।
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