नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग को डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर अपने निवेशकों के शेयरों के साथ धोखाधड़ी का आरोप है। इसके चलते हजारों निवेशकों को अरबों रुपये का नुकसान हुआ है। एनएसई ने आज कहा है कि उसने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग को डिफॉल्टर घोषित करते हुए उसे अपनी मेंबरशिप से भी बाहर कर दिया है। एनएसई के अनुसार कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर यह कार्रवाई एनएसईआईएल के नियम 1 और नियम 2 के तहत की गई है। कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर एनएसई से 23 नवंबर 2020 को मार्केट बंद होने के बाद से बार कर दिया गया है। अब कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के माध्यम से कोई भी एनएसई में शेयर की खरीद और बिक्री नहीं कर पाएगा। आशंका है कि कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग ने पॉवर ऑफ एटॉर्नी के दुरुपयोग से करीब 2,300 करोड़ रुपये की सिक्युरिटीज को अपने अकाउंट में ट्र्रांसफर किया था।

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ये है कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर आरोप

जानकारी के अनुसार नवंबर 2019 में कार्वी ब्रोकरेज हाउस ने अपने निवेशकों से बिना अथॉरिटी लिए हुए 95,000 निवेशकों के करीब 2300 करोड़ रुपये के शेयर यानी सिक्योरिटीज को कंपनी के नाम पर ट्रांसफर कर लिया था। कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग ने निवेशकों से ली पॉवर ऑफ अटर्नी का गलत इस्तेमाल किया और निवेशकों के शेयर अकाउंट के अकाउंट में ट्रांसफर किए।

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सेबी कर चुका है ये कार्रवाई

22 नवंबर 2019 को सेबी ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर नए क्लाइंट बनाने पर रोक लगा दी थी। वहीं शेयर की खरीद बिक्री करने और पॉवर ऑफ अटर्नी के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई थी। हालांकि कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग ने होशियारी दिखाते हुए अपने शेयरों के बजाए निवेशकों के शेयर गिरवी रखकर भारी मात्रा में बाजार से फंड जुटाया। कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग ने इस जुटाए का फंड का कुछ हिस्सा कार्वी रियल्टी लिमिटेड जैसी अपनी कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया।

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फंसा हुआ है निवेशकों का पैसा

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के कामकाज पर रोक लगने के बाद से निवेशकों शेयर और पैसा फंसा हुआ है। ऐसे में उम्मीद है कि निवेशक एनएसई के इनवेस्टर प्रोटेक्शन फंड (आईपीएफ) में आवेदन करके अपने 25 लाख रुपये तक के नुकसान की भरपाई की मांग कर सकते हैं।