NPS: भारत में कर्मचारी वर्ग के लोग रियारमेंट के बाद के जीवन को बेहतर तरीकों से गुजानरे के लिए बचत करते हैं। एनपीएस (National Pension Scheme) एक रियारमेंट बचत योजना है जो कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद के जरूरतों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। लेकिन यदि अभिदाता की मृत्यु 60 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले हो जाती है तो पूरी पेंशन राशि का भुगतान नॉमिनी या उत्तराधिकारी को कर दिया जाता है। निवेशक के मृत्यू के बाद वार्षिकी की कोई खरीद नहीं की जाती है। आइए इसके बारे में विस्तार से समझते हैं।
मृत्यु के बाद एनपीएस पर दावे की प्रक्रिया
पीएफआरडीए (PFRDA) के दिशानिर्देशों के अनुसार नामांकित व्यक्ति को एनपीएस की राशि पर क्लेम करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करना होता है।
- नामांकित व्यक्ति को फोटो और हस्ताक्षर के साथ बैंक का केवाईसी स्पस्टिकरण प्रमाणपत्र जमा करना होगा
- नामित बैंक अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित बैंक का पत्र की जरूरत होगी
- मृत्यु प्रमाण पत्र, आईडी प्रमाण और एड्रेस प्रमाण आदि सभी आवश्यक - दस्तावेजों के साथ एक विधिवत भरा हुआ मृत्यु निकासी फॉर्म।
- मृत्यु निकासी फॉर्म सीआरए वेबसाइट www.npscra.nsdl.co.in पर उपलब्ध है। - प्रपत्र अनुभाग के तहत, इन सभी दस्तावेजों को एनपीएस ट्रस्ट को जमा करना होता हैं।
- सत्यापन के बाद एनपीएस ट्रस्ट सीआरए को आपका क्लेम ट्रांसफर करेगा।
दूसरा तरीका यह है कि नामांकित व्यक्ति किसी भी बैंक पीओपी को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ मृत्यु निकासी फॉर्म जमा कर सकता है और वे सीआरए सिस्टम में मृत्यु के दावे को आगे बढ़ाएंगे।
एक से अधिक नॉमिनी होने की स्थिती में
- ऐसे मामले में, सभी पंजीकृत नामांकित व्यक्तियों को एक निकासी फॉर्म जमा करना होता है।
- यदि कोई नामांकित व्यक्ति दावा नहीं करना चाहता है तो उस नामांकित व्यक्ति को एक त्याग पत्र प्रस्तुत करना होता है।
- नामांकित व्यक्ति जो एनपीएस के लाभों का दावा करना चाहता है उसे एक सिक्योरिटी बांड जमा करना होगा।
- यदि कोई नामांकित व्यक्ति नाबालिग है तो नाबालिग की ओर से अभिभावक नाबालिग के जन्म प्रमाण के साथ फॉर्म जमा कर सकते हैं।
अगर कोई नॉमिनी नहीं है तो क्या है प्रक्रिया
यदि कोई नामांकन पंजीकृत नहीं है, तो पूरी पेंशन राशि का भुगतान ग्राहक के कानूनी उत्तराधिकारी को किया जाता है। राशि का दावा करने के लिए व्यक्ति को कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति या परिवार के सदस्य प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति बनावे के इसे फार्म के साथ लगाना होता है। इसके बाद राशि सिधे लाभार्थी के खाते में जमा किया जाता है।
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