नयी दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम या एनपीसीआई ने ऑनलाइन पेमेंट को लेकर बड़ा फैसला लिया है। एनपीसीआई ने सभी घरेलू यूपीआई मर्चेंट (पी2एम) लेनदेन के लिए यूपीआई इंटरचेंज और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर शुल्क को खत्म करने का फैसला लिया है। एनपीसीआई ने 1 जनवरी से प्रभाव में आये इन चार्जेस को उसी प्रभावी डेट से हटा दिया है। हालांकि बता दें कि फिलहाल ये चार्ज 30 अप्रैल तक की अंतरिम अवधि के लिए हटाये गये हैं। ध्यान रहे कि ईएमआई, ओवरड्राफ्ट अकाउंट और बिजनेस-टू-बिजनेस कलेक्शन और पेमेंट के लिए यह नियम लागू नहीं होगा। एनपीसीआई ने इन दोनों चार्जेस को हटाने का फैसला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) हटाये जाने के बाद लिया है।
बैंक RuPay डेबिट कार्ड और UPI लेनदेन के लिए व्यापारियों से कोई MDR नहीं ले सकते हैं इसलिए यह उम्मीद की गई थी कि उन्हें अन्य स्टेकहोल्डर को शुल्क का भुगतान नहीं करने की राहत दी जाएगी। हालांकि इस कदम से फोनपे, गूगल पे और अमेजन पे जैसे डिजिटल पेमेंट प्लेयर्स की आमदनी प्रभावित हो सकती है, जो यूपीआई इकोसिस्टम में अधिक से अधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए भारी खर्चा करती हैं।
एनपीसीआई का नया फैसला गूगल पे जैसी सभी ऑनलाइन पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के लिए झटका है। क्योंकि अब ग्राहकों जो पेमेंट करते हैं उस पर होने वाली इनकम गूगल पे और अमेजन पे जैसी कंपनियां नहीं कर पायेंगी। बता दें कि इन कंपनियों को हर लेन-देन पर 30-35 पैसे की कमाई हो रही थी। यानी थोड़ा या बहुत मगर इन कंपनियों की आमदनी जरूर प्रभावित होगी।
जैसा कि सभी घरेलू यूपीआई मर्चेंट लेनदेन के लिए यूपीआई इंटरचेंज और पीएसपी शुल्क की समाप्ति 1 जनवरी से लागू हुई थी। मगर अब उसी तारीख से प्रभाव से ये दोनों चार्ज हटा दिये गये हैं। ऐसे में ये बात साफ नहीं है कि अभी तक इकट्ठे हो चुके शुल्क कैसे वसूल किया जाएगा। पिछले कुछ समय में भारत में डिजिटल पेमेंट कारोबार और ग्राहकों की संख्या में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
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