नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एम के जैन ने मंगलवार को मुद्रा लोन में बढ़ते एनपीए को लेकर बैंकरों को चेतावनी जारी की है। जैन ने बैंकों को ऐसे लोन पर बारीक नजर रखने को कहा है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में अस्थिर क्रेडिट ग्रोथ से सिस्टम जोखिम में आ सकता है। आंकड़ों के मुताबिक मुद्रा योजना के तहत 3.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक के लोन दिये गये हैं। मुद्रा योजना में कुल एनपीए देखें तो यह वित्त वर्ष 2017-18 में 2.52% से 2018-19 में बढ़ कर 2.68% हो गये। जून 2019 में सामने आये आंकड़ों में पता चला था कि 2018-19 में मुद्रा लोन में 9,204.14 करोड़ रुपये तक एनपीए बढ़े। वहीं मार्च 2019 तक ये 16,481.45 करोड़ रुपये पर पहुँच गये, जो मार्च 2017 तक 7,277.31 करोड़ रुपये के थे। याद रहे कि मुद्रा योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में की थी, जिसका उद्देश्य एमएसएमई सेक्टर को कम ब्याज दर पर कर्ज देना है।

Advertisement

36 लाख से ज्यादा एनपीए खाते
मार्च 2019 तक के आँकड़ों में बताया गया है कि कुल दिये गये 18.26 करोड़ मुद्रा लोन में से 36 लाख से अधिक एनपीए खाते हो गये हैं। मुद्रा योजना के तहत मिलने वाले 10 लाख रुपये तक के लोन बैंक, गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियाँ, कोऑपरेटिव या स्मॉल फाइनेंस बैंक देते हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि मुद्रा योजना के जरिये लोग गरीबी से बाहर आ सकते थे, पर इस योजना में एनपीए बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में बताया था कि 4.25 करोड़ लोगों ने इस योजना के तहत लोन लिया है।

Advertisement

क्या है मुद्रा योजना?
मुद्रा योजना के तहत नया कारोबार शुरू करने वाले या अपने कारोबार को बढ़ाने वालों को लोन दिया जाता है। इस योजना के तहत आप तीन प्रकार के लोन ले सकते हैं। इनमें शिशु लोन के तहत 50,000 रुपये, किशोर लोन के तहत 5 लाख रुपये तक और तरुण लोन के तहत 10 लाख रुपए तक का लोन लिया जा सकता है। बढ़ने एनपीए के बीच मुद्रा योजना से 51 लाख नये उद्यमी भी बने हैं।

Advertisement

यह भी पढ़ें - दूरसंचार विभाग ने पीएसयू कंपनियों से भरने को कहा एजीआर : रिपोर्ट