Finance Minister Nirmala Sitharaman की तरफ से कहा गया है कि इंडियन कंपनियों के शेयर अब सीधे विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) पर लिस्ट हो पाएंगें।

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मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार यह मंजूरी कोविड राहत पैकेज के हिस्से के रूप में ऐलान के 3 वर्ष के बाद दी गई है। इस मंजूरी से घरेलू कंपनियों को अपने शेयरों को कई सारे विदेशी एक्सचेंजों पर लिस्ट करके विदेशी फंड तक पहुंचने की परमिशन मिल जाएगी। बता दें कि पहली बार यह प्रस्ताव कोरोना महामारी के वक्त तरलता पैकेज के हिस्से के रूप में मई 2020 में हुआ था।

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वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से कहा गया है कि घरेलू कंपनियों द्वारा प्रतिभूतियों की प्रत्यक्ष लिस्टिंग अब विदेशी न्यायक्षेत्रों में स्वीकार्य होगी। उन्होंने कहा कि मुझे यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने आईएफएससी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों की डारेक्ट लिस्टिंग को सक्षम करने का फैसला लिया है।

मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि भारतीय कंपनियों की सीधे विदेशी लिस्टिंग के नियम कुछ ही हफ्तों में अधिसूचित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शुरू में भारतीय कंपनियों को आईएफएससी पर लिस्टेड होने की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद उन्हें निर्दिष्ट 7 या 8 विदेशी न्यायक्षेत्रों में अनुमति दी जाएगी।

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वित्तीय मंत्री की तरफ से कहा गया है कि घरेलू कंपनियों की प्रत्यक्ष विदेशी लिस्टिंग डेट फंडों के लिए एक बेलआउट सुविधा है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा लोन मार्केट में तनाव के वक्त निर्दिष्ट लोन निधियों के लिए बैकस्टॉप सुविधा के रुप में काम करेगी। उन्होंने कहा कि जिसकी घोषणा सेबी की तरफ से पिछले महीने की गई थी।

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मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार यह कदम कॉर्पोरेट लोन मार्केट में म्यूचुअल फंड और इंवेस्टर के विश्वास को और मजबूत करने के लिए है। इसके साथ ही कॉर्पोरेट लोन प्रतिभूतियों में द्वितीयक मार्केट की तरलता में सुधार लाने के लिए है।