नई दिल्ली, नवंबर 21। भारत में गाय को बहुत पवित्र माना जाता है। कई चीजों में गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है। बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार तो किसानों से गोबर खरीदती है ताकि इसका इस्तेमाल खाद वगैरह तैयार किए जाने में किया जा सके। मगर एक देश में अब गाय के गोबर से बिजली बनाई जा रही है। जी हां ब्रिटेन में गाय के गोबर से अब बिजली तैयार हो रही है। ब्रिटिश किसानों का एक समूह गाय के गोबर को एए-आकार की 'पैटरियों' के रूप में बिजली में बदल रहा है। ये रिचार्जेबल 'पैटरीज' ब्रिटेन के रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशन का एक तरीका हो सकता है।
1 किलो गाय के गोबर से 3.75 किलोवाट बिजली जनरेट हो सकती है। यह एक वैक्यूम क्लीनर को पांच घंटे या 3.5 घंटे तक एक इस्त्री चलाने के लिए पर्याप्त बिजली है। द इंडीपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार डेयरी कोऑपरेटिव अरला, जिसने बैटरी विशेषज्ञ, जीपी बैटरी के साथ इसके लिए बैटरी डेवलप की है, का दावा है कि एक गाय के गोबर से बनाई गई ऊर्जा एक साल के लिए तीन घरों को बिजली प्रोवाइड करा सकती है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 460,000 गायों के गोबर से आश्चर्यजनक रूप से यूके के 12 लाख घरों को ऊर्जा मिल सकती है। बिजली का एक विश्वसनीय और सुसंगत स्रोत, जैसे गाय का घोल, जिसका अरला सालाना 1 मिलियन टन से अधिक का उत्पादन करती है, बिजली घरों और परिवहन के लिए नए अवसर प्रदान कर सकती है।
एनारोबिक डायजेस्शन नामक प्रोसेस के माध्यम से घोल को ऊर्जा में बदल दिया जाता है। अरला के एक किसान कहते हैं कि खेतों पर गाय का गोबर आसानी से उपलब्ध है, जिसमें कृषि उत्सर्जन को कम करते हुए यूके की अक्षय ऊर्जा जरूरतों में योगदान करने के लिए एनारोबिक डायजेस्शन जैसे नवाचारों के लिए बहुत अधिक संभावनाएं हैं। वे अपने खेत पर पहले से ही गाय के गोबर के घोल से जनरेट ऊर्जा का उपयोग पूरी फार्म की बिजली के लिए करते हैं।
एनारोबिक डायजेस्शन के प्रोसेस के दौरान, बायोगैस और जैव-उर्वरक का उत्पादन करने के लिए पशु अपशिष्ट जैसे कार्बनिक पदार्थ को तोड़ दिया जाता है। यह प्रोसेस ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में एक सीलबंद, ऑक्सीजन मुक्त टैंक में होती है जिसे एनारोबिक डाइजेस्टर कहा जाता है। अंतिम उत्पाद बायोगैस होता है। एक बार बायोगैस को साफ करने के बाद, इसे एक संयुक्त ताप और बिजली (सीएचपी) यूनिट में ले जाया जाता है, जहां इसका उपयोग अक्षय ऊर्जा जनरेट करने के लिए किया जाता है।
अंतिम उत्पाद पोषक तत्वों से भरपूर, कम उत्सर्जन वाला, प्राकृतिक उर्वरक होता है, जिसे मिट्टी को पोषण देने में मदद करने के लिए वापस जमीन में डाला जा सकता है। अरला स्थायी खेती और खाद्य उत्पादन से उत्सर्जन को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके कुछ किसान पहले से ही गाय के गोबर को ऊर्जा में बदल रहे हैं। यदि यूके की सरकार और ऊर्जा उद्योग इस क्षमता पर काम करती है तो इस बिजली का विस्तार यूके की अक्षय ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक गेम-चेंजर हो सकता है।
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