नयी दिल्ली। आरबीआई ने 2019 की अपनी आखरी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। हालाँकि लगाया जा अनुमान था कि आरबीआई इस बार भी रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। वहीं शेयर बाजार के निवेशकों और जानकारों को भी रेपो रेट में कटौती की उम्मीद थी। मगर आरबीआई ने शेयर बाजार की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए रेपो रेपो को 5.15 फीसदी पर ही बरकरार रखा है। हालाँकि इससे पहले 2019 में आरबीआई ने अपनी लगातार 5 मौद्रिक नीति समिति की बैठकों में कुल मिला कर 1.35 फीसदी रेपो रेट घटायी है। रेपो रेट के साथ साथ आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट को 4.90 फीसदी और बैंक रेट को 5.40 फीसदी ही बरकरार रखा है। आरबीआई के रेपो रेट और न घटाने पर विश्लेषक और जानकारों ने एक तरह से निराशा जतायी है। नजर डालते हैं जानकारों की आ रही प्रतिक्रिया पर।

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निराश हैं फिक्की अध्यक्ष
भारत में व्यापारिक संगठनों के संघ फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी फिक्की के अध्यक्ष संदीप सोमानी ने आरबीआई के रेपो रेट न घटाने पर निराशा जतायी है। उनके मुताबिक पॉलिसी रेट के मोर्चे पर लगातार कार्रवाई की जरूरत है। एसएनजी ऐंड पार्टनर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश नारायण गुप्ता ने आरबीआई के फैसले को बाजार की उम्मीदों के उलट बताया है। उनके मुताबिक बेशक मौद्रिक नीति समिति ने भविष्य में दरों की गुंजाइश रखी है, मगर सिर्फ नीतिगत कदम अर्थव्यवस्था की मंदी को दूर करने, जीडीपी आँकड़ों को बेहतर करने और हाई ग्रोथ रेट पर अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।

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आगे है रेपो दर घटाने की गुंजाइश
वहीं जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज की अर्थशास्त्री दीप्ति मैरी मैथ्यू के मुताबिक आरबीआई ने अकोमोडेटिव रुख बरकरार रखा है, जिससे भविष्य में दरों में कटौती की उम्मीद है। उनके मुताबिक आरबीआई मुद्रास्फीति को लक्षित दायरे में बनाये रखने पर ध्यान दे रहा है। मगर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य अर्थशास्त्री निखिल गुप्ता कहते हैं कि जब तक मुद्रास्फीति 4 फीसदी तक नहीं आती तब तक और अधिक दरों में कटौती की संभावना नहीं है। वहीं एमके वेल्थ मैनेजमेंट के रिसर्च प्रमुख डॉ. जोसेफ थॉमस ने तीन कारण बताये हैं जिनके चलते रेपो रेट और घटाने की जरूरत नहीं है। इनमें मुद्रास्फीति का बढ़ना, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया और इंटरबैंक बाजार में लिक्विडी का सरप्लस होना शामिल है।

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