Share Market हमेशा अनिश्चितताओं से भरा रहता है। कब बाजार में तेजी आएगी और कब गिरावट, इसका सटीक अनुमान कोई नहीं लगा सकता। हालांकि, पिछले आंकड़ों, आर्थिक रिपोर्ट्स और दुनियाभर की घटनाओं के आधार पर बाजार की संभावित दिशा का अंदाजा जरूर लगाया जाता है। आज हम बात करेंगे निफ्टी की और समझने की कोशिश करेंगे कि आगे इसकी चाल कैसी रह सकती है।

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इस साल अब तक निफ्टी करीब 7% का निगेटिव रिटर्न दे चुका है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता रही, जिसने निवेशकों की धारणा पर असर डाला और बाजार पर दबाव बढ़ाया। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ है, कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है, फिर भी शेयर बाजार में वैसी तेजी देखने को नहीं मिल रही, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

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10 साल का डाटा क्या कहता है?

पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2016 में निफ्टी ने 4.23%, 2017 में 5.84% और 2018 में 5.99% का शानदार रिटर्न दिया। इसके बाद 2019 में तस्वीर बदली और जुलाई में निफ्टी 5.69% टूट गया। फिर 2020 में जोरदार वापसी करते हुए 7.49% की तेजी दर्ज की गई। 2021 में बढ़त सीमित रही और इंडेक्स सिर्फ 0.26% ऊपर बंद हुआ। 2022 जुलाई का सबसे दमदार साल साबित हुआ, जब निफ्टी ने 8.73% की शानदार रैली दिखाई। इसके बाद 2023 में 2.94% और 2024 में 3.92% की बढ़त रही, जबकि 2025 में एक बार फिर निफ्टी 2.93% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

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अगर पूरे 10 साल के रिकॉर्ड को देखें, तो एक दिलचस्प बात सामने आती है। जुलाई में सिर्फ 2 बार ही निफ्टी गिरा है, जबकि 8 बार बाजार ने पॉजिटिव रिटर्न दिया है। यानी इतिहास के मुताबिक जुलाई का महीना निवेशकों के लिए ज्यादातर फायदेमंद रहा है। सबसे बड़ी गिरावट 2019 में 5.69% की रही, जबकि सबसे शानदार तेजी 2022 में 8.73% दर्ज की गई।

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बड़ी गिरावट और तेज रैली की वजह-

जुलाई 2019 में पेश हुए Union Budget ने बाजार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। निवेशकों को बड़े आर्थिक सुधारों और प्रोत्साहन पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सबसे बड़ा झटका Foreign Portfolio Investors यानी FPIs पर लगाए गए Super Rich Tax Surcharge से लगा। इसके बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया। साथ ही कई कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, खासकर बैंकिंग, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में। दूसरी ओर US-China Trade War और कमजोर मानसून जैसी चिंताओं ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। नतीजा यह हुआ कि जुलाई 2019 में निफ्टी करीब 5.7% टूट गया।

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अब बात करते हैं 2020 की। यह कोविड महामारी का दौर था। मार्च 2020 में बाजार करीब 23% तक टूट चुका था। इतनी बड़ी गिरावट के बाद वैल्यूएशन आकर्षक हो गए और निवेशकों ने खरीदारी शुरू कर दी। अप्रैल, मई और जून में रिकवरी का माहौल बना और उसी का असर जुलाई में भी देखने को मिला, जब निफ्टी ने 7.49% की मजबूत बढ़त दर्ज की।

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अब आते हैं 2022 पर, जो पिछले 10 सालों का सबसे शानदार जुलाई रहा। लगातार तीन महीने की गिरावट के बाद निफ्टी ने 8.73% की जोरदार रैली दिखाई। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि पहली छमाही में लगातार बिकवाली करने वाले Foreign Portfolio Investors जुलाई में फिर से खरीदार बन गए। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, जिससे भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था को राहत मिली। अमेरिका समेत वैश्विक बाजारों में भी माहौल सुधरा और निवेशकों को उम्मीद बंधी कि ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी का दौर अपने अंतिम चरण में पहुंच सकता है। गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन, शॉर्ट कवरिंग और बैंकिंग, फाइनेंशियल, FMCG तथा मेटल सेक्टरों में खरीदारी ने इस रैली को और मजबूत बनाया।

2026 में इतिहास खुद को दोहराएगा?

पिछले 10 साल के आंकड़े जुलाई के पक्ष में दिखाई देते हैं। इस साल अब तक निफ्टी 5% से ज्यादा का निगेटिव रिटर्न दे चुका है। वहीं अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। अगर क्रूड में नरमी बनी रहती है, तो बाजार को इससे आगे भी सपोर्ट मिल सकता है।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी पूरी तरह थमी नहीं है, हालांकि बीच-बीच में उनकी खरीदारी लौटती भी दिखाई दे रही है। अगर आने वाले दिनों में FII का भरोसा और मजबूत होता है, तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, मानसून की स्थिति और कंपनियों के Q1 नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे और मानसून सामान्य रहा, तो बाजार का सेंटीमेंट मजबूत हो सकता है। लेकिन कमजोर नतीजे या किसी वैश्विक झटके की स्थिति में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

यानी फिलहाल इतिहास, गिरते कच्चे तेल और बेहतर होते वैश्विक संकेत बाजार के लिए सकारात्मक नजर आ रहे हैं। लेकिन निवेशकों की नजर अब FII Flows, Q1 Results और Monsoon पर रहेगी। यही तीन बड़े फैक्टर तय करेंगे कि जुलाई 2026 भी पिछले ज्यादातर वर्षों की तरह तेजी वाला महीना साबित होगा या नहीं।

[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]