नयी दिल्ली। 5जी इंटरनेट का इंतजार करने वालों के लिए खुशखबरी है। सरकार ने देश में 5जी इंटरनेट शुरू करने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। दरअसल सरकार ने हुआवेई सहित सभी कंपनियों को ट्रायल के लिए 5जी स्पेक्ट्रम देने का फैसला किया है। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि हमने सभी कंपनियों को 5जी स्पेक्ट्रम देने का फैसला किया है। इस मामले में फैसला लिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 5जी भविष्य है, स्पीड है। हम 5जी में नए इनोवेशन को प्रोत्साहित करेंगे। सूत्रों ने कहा कि हुआवेई सहित सभी ऑपरेटरों और विक्रेताओं को ट्रायल में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा था कि अगले साल 5जी की शुरुआत हो सकती है। हालांकि टेलीकॉम कंपनियों की वित्तीय हालत इस रास्ते में एक रुकावट है। अपनी बैलेंस शीट सुधारने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को अपने प्लान महंगे करने पड़े हैं, जिनमें एयरटेल की तरफ से अभी और टैरिफ बढ़ाये जाने की मांग की गयी है। एयरटेल ने इस मामले में ट्राई से हस्तक्षेप करने को कहा है।

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2020 में 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी
आपकी जानकारी के लिए बता दें अगले साल भारत में 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी। अब तक की सबसे बड़ी एयरवेव्स नीलामी में सरकार को 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिल सकती है। डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) ने मंजूरी दे दी है, जिससे मार्च-अप्रैल 2020 में स्पेक्ट्रम की बिक्री संभव है। मगर टेलीकॉम कंपनियों के मुताबिक 5जी के लिए 492 करोड़ रुपये प्रति यूनिट की कीमत गंभीर निविदाओं को आकर्षित करने के लिए बहुत ज्यादा है। खास कर टेलीकॉम कंपनियों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए।

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कोरिया की तुलना में महंगा स्पेक्ट्रम
बता दें कि दक्षिण कोरिया में 5जी की प्रति यूनिट के लिए 65 करोड़ रुपये का बेस प्राइस है। वहीं भारत में यह 492 करोड़ रुपये है। ट्राई ने 20 मेगाहर्ट्ज के ब्लॉक में रेडियोवेव की सिफारिश की है। यानी 100 मेगाहर्ट्ज की वॉल्यूम खरीदने के लिए, एक ऑपरेटर को कम से कम 50,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। मगर इससे पहले वोडाफोन, आइडिया और जियो को फिर से उन क्षेत्रों में 4जी स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगानी होगी जहां इन एयरवेव्स पर उनका अधिकार 2021 में समाप्त होने वाला है।

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