नयी दिल्ली। केंद्र और राज्य सरकारों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की मदद के लिए कई उपाय किए हैं। सरकारों की तरफ से अभी भी बहुत से कदम उठाए जा रहे हैं। इसकी वजह है देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में एमएसएमई का योगदान। कोरोना संकट ने एमएसएमई को भी बुरी तरह प्रभावित किया, जिसे देखते हुए सरकार ने सेक्टर की सहायता के लिए कई कदम उठाए। अब इसी कड़ी में सरकार एक और फैसला ले सकती है। बीते शनिवार को एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार घरेलू व्यवसायों को समर्थन देने के लिए कुछ सेक्टरों के उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार करेगी।

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प्रोडक्शन में होगा इजाफा
गडकरी ने इंडिया@75 शिखर सम्मेलन में कहा कि इस फैसले को अच्छा नहीं माना जाएगा। उन्होंने जिन क्षेत्रों के प्रोडक्ट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है उनका नाम लिए बिना ये बात कही। हालांकि उन्होंने कहा कि इम्पोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी से निर्माताओं को उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिसके नतीजे में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए उत्पादों की लागत में कमी आएगी।

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आयात पर कम हो निर्भरता
इस कार्यक्रम में गडकरी ने उद्योगों से निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम करने का भी आग्रह किया। उन्होंने निर्यात के लिए समस्याओं और बाजारों की पहचान करने में एक सेक्टर-विशिष्ट दृष्टिकोण का भी सुझाव दिया। उन्होंने उद्योग जगत से एमएसएमई के लिए कम लागत वाले विदेशी फंड्स को हासिल करने के तरीकों पर भी नजर रखने की बात कही।

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सरकार के एमएसएमई के लिए उपाय
महामारी के बीच भारत ने अन्य देशों पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए मई में आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू किया। हाल के महीनों में सरकार ने देश में बांस उत्पादकों को समर्थन देने के लिए अगरबत्ती बनाने में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया। पिछले हफ्ते एमएसएमई मंत्रालय ने अगरबत्ती बनाने में शामिल कारीगरों के लिए और 'ग्रामोदय विकास योजना' के तहत गाँव उद्योग को विकसित करने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया।

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