नयी दिल्ली। कोरोनावायरस ने शेयर बाजार की हालत खराब कर दी। इसका असर म्यूचुअल फंड्स पर भी पड़ा। खास कर म्यूचुअल फंड्स इक्विटी स्कीम के रिटर्न निगेटिव हो गए। बावजूद इसके लॉकडाउन के दौरान म्यूचुअल फंड्स ने शेयर बाजार में 1230 करोड़ रुपये का निवेश किया। इतना ही नहीं म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अभी भी फंड हाउस शेयर बाजार में और निवेश के लिए एक बेहतर मौके की तलाश में हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट हाउसेज द्वारा किसी भी संभावित रिडम्पशन (म्यूचुअल फंड से पैसा निकालना) के लिए हाई लिक्विडिटी भी बना रखी है। आगे बढ़ते हुए सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर जिससे इक्विटी में म्यूचुअल फंड्स द्वारा किया जाने वाला निवेश तय होगा, वो निवेशकों द्वारा म्यूचुअल फंड में किया जाना वाले निवेश है। दरअसल कई रिटेल निवेशकों के सामने अगली तिमाही या उसके बाद भी वेतन कटौती और नौकरी खोने का संकट है।

Advertisement

म्यूचुअल फंड्स का इक्विटी बाजार में निवेश
मार्केट रेगुलेटर सेबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 मार्च को कोरोनोवायरस महामारी से निपटने के लिए देश भर में लगाए गए लॉकडाउन की घोषणा के बाद से म्यूचुअल फंड्स ने शेयर बाजार में 1,230 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। म्यूचुअल फंड्स ने मार्च के अंतिम सप्ताह में शेयरों में 6,363 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि अप्रैल में 7,965 करोड़ रुपये निकाल लिए। इसके बाद मई में उन्होंने 2,832 करोड़ रुपये का निवेश किया। एक्सपर्ट के मुताबिक म्यूचुअल फंड इक्विटी में बड़ी मात्रा में निवेश नहीं कर रहे हैं। दरअसल वे एक अच्छे मौके के इंतेजार में हैं, जो जो उन्हें लगता है कि दो महीने के भीतर आ जाएगा।

Advertisement

मार्च में 30000 करोड़ रु से ज्यादा का निवेश
मार्च में कई शेयर अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए थे। इसी को देखते हुए पूरे महीने में म्यूचुअल फंड्स ने आकर्षक वैल्यूएशन पर शेयरों में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। ध्यान देने वाली बात ये है कि विदेशी निवेशकों ने इक्विटी से मार्च में 61,973 करोड़ रुपये और अप्रैल में 6,883 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली, क्योंकि उन्हें कोरोना के कारण वैश्विक मंदी का डर था। हालांकि उन्होंने मई में इक्विटी बाजार में 14,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया।

Advertisement