नयी दिल्ली। भारत के इक्विटी बाजार का वैश्विक बाजार पूंजीकरण में 3 फीसदी हिस्सा है। यानी पूरी दुनिया के बाजारों में भारतीय शेयर बाजार की हिस्सेदारी मात्र 3 फीसदी है। इसलिए एक्सपर्ट विदेशों में निवेश करके अपने निवेश पोर्टफोलियो को विस्तार देने की सलाह देते हैं। वैश्विक इक्विटी में निवेश करने से आपको अमेजन, नेटफ्लिक्स, फेसबुक, ट्विटर, वॉलमार्ट और टेस्ला जैसी विश्व स्तरीय कंपनियों में पैसा लगाने का मौका मिल सकता है। ये वो कंपनियां जिन्होंने पिछले कुछ सालों में जोरदार ग्रोथ की है। हालांकि भारतीय शेयर एक्सचेंजों के माध्यम से वैश्विक इक्विटी बाजार में निवेश कर पाना संभव नहीं है। क्या है इसका तरीका आइए जानते हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार म्यूचुअल फंड विदेशी बाजारों में पैसा लगाने का सबसे बेहतरीन रास्ता है। निवेशक अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का 10-15 फीसदी हिस्सा वैश्विक कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। लेकिन पिछले दशक में वैश्विक इक्विटी में तेज वृद्धि को देखते हुए आपके लिए व्यक्ति सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के माध्यम से वैश्विक फंड्स में निवेश करना बेहतर ऑप्शन है। इसके बाद एसआईपी ही या एसटीपी (व्यवस्थित हस्तांतरण योजना) रूट का उपयोग करके अगले एक-दो वर्षों में अपने निवेश को बढ़ाएँ।
वैश्विक इक्विटी में निवेश करने वाले फंड्स में मोतीलाल ओसवाल नैस्डैक 100 ईटीएफ, पीजीआईएम इंडिया ग्लोबल इक्विटी अपॉर्च्यूनिटीज, फ्रैंकलिन इंडिया फीडर फ्रैंकलिन यूएस अपॉर्च्यूनिटीज, इडेलवाइज ग्रेटर चाइना इक्विटी ऑफ-शोर और निप्पॉन इंडिया यूएस इक्विटी अपॉर्च्यूनिटीज शामिल हैं। इनमें पीजीआईएम ग्लोबल इक्विटी अपॉर्चुनिटीज फंड ने पिछले तीन वर्षों में 30.72 फीसदी वार्षिक रिटर्न दिया है, जबकि पिछले 5 साल की अवधि में इसका सालाना 16.60 फीसदी रहा है। वहीं फ्रेंकलिन इंडिया फीडर फ्रेंकलिन अमेरिकी अपॉर्चुनिटीज, इडेलवाइज ग्रेटर चाइना इक्विटी ऑफ-शोर और निप्पॉन इंडिया यूएस इक्विटी अपॉर्चुनिटीज फंड्स ने पिछले तीन वर्षों में 20 फीसदी से अधिक का सालाना रिटर्न दिया है। वहीं पिछले पांच वर्षों में इनका रिटर्न 15-20.64 फीसदी के बीच रहा है।
एचएनआई (High Networth Individual) या अधिक पैसे वाले निवेशकों के पास सीधे वैश्विक इक्विटी खरीदने का विकल्प है। छोटे पोर्टफोलियो वाले रिटेल निवेशक म्यूचुअल फंड के माध्यम से उपलब्ध फीडर फंड रूट का उपयोग करके वैश्विक इक्विटी में निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड वैसे भी रिटेल निवेशकों के लिए एक बेहतर ऑप्शन है, जिसमें एसआईपी के जरिए छोटी-छोटी रकम लंबे समय तक निवेश की जा सकती है। म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिए छोटी रकम के लगातार निवेश से बड़ी अवधि में एक बड़ा फंड बनाया जा सकता है। मगर इस बात का ध्यान रखें कि इक्विटी निवेश जोखिम से खाली नहीं है।
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