Muharram 2024: मुहर्रम का महीना मुस्लिम समुदाय में काफी ज्यादा महत्व रखता है, मुहर्रम महीने के साथ ही इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नए साल का आगाज होता है। इस्लामिक कैंलेडर का पहला महीना मुहर्रम इतवार यानी 7 जुलाई से शुरू हो गया है, इस महीने की अहमियत काफी ज्यादा है मुहर्रम में मुस्लिम लोग रोज़े रखते हैं और कई जुलूस भी निकालते हैं और ये सब लोग अपनी मगफिरत की दुआ मांगते हैं।

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मुहर्रम महीने के आगाज के बाद चांद की 10 तारीख यानी आशुरा का दिन काफी महत्व रखता है, इस दिन कर्बला में इमाम हुसैन अपने घरवालों और 72 लोग लोगों के साथ कर्बला में जंग के दौरान शहीद हो गए थे। मुस्लिम समुदाय में इस महीने को खुशी के साथ नहीं मनाया जाता है बल्कि इस महीने में गम मनाया जाता है। जिस तरह ईद पर लोग नए कपड़े पहनते हैं इस महीने में कोई भी नए कपड़े पहने की कोशिश करता है।

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पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन 72 लोगों के साथ मदीने से कूफे के लिए रवाना हो गए थे उस वक्त कूफे का हाकिम यजीद ने ऐलान करवाया था कि हम और हमारे सारे लोग इमाम हुसैन के हाथ पर बैत करेंगे (यानी अपना गुरु बनाएंगे) लेकिन उसने अपने बात से वादाखिलाफी कर दी हैं और उनके साथ जंग का ऐलान करवा दिया जिसके बाद इमाम हुसैन 72 लोग और यजीद की तरफ से लाखों लोग लड़ने के लिए तैयार हो गए 10 दिन की जंग के दौरान इमाम हुसैन और उनके घर वाले शहीद हो जाते हैं। उस दिन के बाद आशुरा का दिन गम दिन का माना जाता है और इस दिन ताजिया निकली जाती है, शौक मनाया जाता है और दुख का माहौल होता है।

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इस साल 2024 में इस्लामिक नए साल का आगाज कब है?

इस साल 2024 में इस्लामिक नए साल का आगाज मुहर्रम महीने की पहली तारीख के अनुसार 7 जुलाई 2024 को हुआ है, लेकिन 10 मुहर्रम आशुरा का दिन बहुत ज्यादा अहम माना जाता है।

इस्लामिक कैलेंडर की शुरुआत कैसे हुई?

622 ईस्वी में इस्लामिक कैलेंडर की शुरुआत हुई थी, पैगंबर मुहम्मद स.व. और उनके सहाबियों के साथ मक्का से मदीने हिजरत कर गए थे, इसलिए कहा जाता है इस्लामिक कैलेंडर को ईस्वी के बजाए हिजरी के नाम से जाना जाता है।