नयी दिल्ली। सरकार एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर के लिए एक और खास योजना लाने की तैयारी कर रही है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सरकार दिवालिया होने वाली एमएसएमई फर्म्स को बचाने के लिए एक विशेष संकल्प योजना पर काम कर रही है। कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत इस योजना को अंतिम रूप दे रहा है और इसे जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। ये आधिकारिक बयान वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा महामारी से संकट में आई अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए किए गए उपायों की समीक्षा के बाद जारी किया गया।
एमएसएमई को मिलेगी राहत
नई योजना को आईबीसी की धारा 240ए के तहत अधिसूचित किया जाएगा। इससे छोटे व्यवसायों के लिए दिवालिया योजना के एक संशोधित वर्जन को निर्दिष्ट किया जाएगा। इससे सेक्शन से सरकार को छोटे कारोबारियों के लिए दिवालिया कानून में बदलाव करने की पावर मिलती है। एमएसएमई के लिए एक बड़ी राहत कोड की धारा 29 ए से होगी, जिसमें कहा गया है कि डिफ़ॉल्ट कंपनी के प्रमुख शेयरधारक रिज़ॉल्यूशन स्कीम में भाग नहीं ले सकते। छोटे व्यवसायों के लिए किसी कंपनी में अन्य निवेशकों की तरफ से अधिक रुचि नहीं हो सकती और इसीलिए प्रमोटरों को रिज़ॉल्यूशन स्कीम से बाहर करना एक अच्छा विचार नहीं हो सकता।
कितना बंट गया लोन
हाल ही में वित्त मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार बैंकों ने 3 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत एमएसएमई सेक्टर को लगभग 1,20,099 करोड़ रुपये के लोन पास कर दिए हैं। हालांकि पास किए गए लोन के मुकाबले एमएसएमई को 100 प्रतिशत ईसीएलजीएस योजना के तहत गुरुवार (9 जुलाई) तक 61,987.90 करोड़ रुपये का लोन ही आवंटित किया गया है। सरकार ने कोरोना संकट में एमएसएमई सेक्टर की मदद के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में 3 लाख करोड़ रु की ईसीएलजीएस का ऐलान किया था।
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