नयी दिल्ली। 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की दूसरी किस्त की घोषणा करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत मजदूरों के नामांकन में पिछले साल मई की तुलना में 40-50 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि मनरेगा के पब्लिक पोर्टल पर मौजूद डेटा से पता चलता है कि योजना के तहत काम हासिल करने वाले मजदूरों की संख्या और उन्हें काम मिलने वालों की संख्या में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में अब तक की अवधि में गिरावट आई है। इस वित्त वर्ष में अब तक मनरेगा के तहत 1.06 करोड़ परिवारों को 13.59 करोड़ व्यक्ति-दिन का रोजगार मिला है। इसके मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में सिर्फ अप्रैल में ही 1.55 करोड़ परिवारों को 24.66 करोड़ व्यक्ति-दिन का काम मिला था। इस साल अप्रैल के लिए संबंधित संख्या सिर्फ 89.66 लाख और 11.08 करोड़ है।

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पिछले कुछ दिनों में हुई बढ़ोतरी
वित्त मंत्री के बयान पर सफाई देते हुए एक सरकारी अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरों के नामांकन में 40-50 फीसदी सिर्फ पिछले कुछ दिनों में हुई है। अप्रैल में बहुत अधिक काम नहीं दिया जा सका, क्योंकि राज्यों और केंद्र सरकार का ध्यान लॉकडाउन का पालन करने पर था। वास्तविक बढ़ोतरी अब हो रही है, जब आर्थिक गतिविधियों को भी खोला जा रहा है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि 13 मई तक 14.62 करोड़ व्यक्ति-दिन का कार्य मनरेगा के तहत जनरेट हुआ।

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प्रवासी मजदूरों से बढ़ेगा काम
मनरेगा रोजगार के मुख्य चालक प्रवासी श्रमिक होंगे जो शहरों और औद्योगिक केंद्रों से अपने गांवों में वापस आ रहे हैं। राज्यों को कहा गया है कि वे मनरेगा के प्रावधानों के अनुसार उदारता के साथ पंजीकरण करें। सरकारी अधिकारी के अनुसार कार्यक्रम के तहत काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को रोजगार दिया जाना चाहिए, भले ही उनके पास जॉब कार्ड हो या फिर वही कार्ड सक्रिय हो या नहीं।

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