नई दिल्ली, सितंबर 07। नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभागों को उन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के समापन (बंद या निपटारा करने) और विनिवेश में तेजी लाने के लिए एक प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है, जिन्हें पहले ही बंद करने के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। बता दें कि 12 अगस्त को कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। उसमें घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को को बंद करने पर चर्चा हुई।
दि प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसे सार्वजनिक उपक्रमों (सरकारी कंपनियों) को बंद करने में देरी होने पर भी कारण बताएं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि सरकार के संसाधन बर्बाद न हों, और ऐसे मामलों में जहां सीपीएसई (केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों), स्वायत्त निकायों और अन्य संस्थाओं को बंद करने के लिए कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है, इसे (बंद करने) तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
गौबा ने जो बैठक बुलाई वो अनिवार्य रूप से केंद्र सरकार के लिए 'विजन इंडिया@2047' की तैयारी के लिए रोडमैप पर चर्चा करने के लिए थी। विजन इंडिया@2047 यह सुनिश्चित करने के लिए एक योजना है कि भारत विश्व स्तर पर शीर्ष-तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान पर आ जाए और देश एक डेवलप नेशन की स्थिति के करीब पहुंच रहा है।
बता दें कि पीएसयू वे कंपनियां होती हैं जिनमें केंद्र सरकार या अन्य पीएसयू की सीधी 51 फीसदी या उससे अधिक हिस्सेदारी होती है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) के अनुसार, कुल ऐसी 607 पीएसयू हैं जिनमें सरकार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदारी रखती है। करीब 90 कंपनियों ने सीएजी को अपनी वित्तीय डिटेल नहीं दी है। 697 में से, लगभग 488 सरकारी कंपनियां हैं, छह वैधानिक निगम (स्टेटुअरी कॉर्पोरेशंस) हैं, और 203 सरकार द्वारा नियंत्रित अन्य कंपनियां हैं।
कैग की दिसंबर 2021 की रिपोर्ट क अनुसार लगभग 181 सरकारी कंपनियों को 2019-20 में 68,434 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। ये घाटा 2018-19 में 40,835 करोड़ रुपये का था। इनमें से 115 को पिछले पांच साल में तीन से पांच साल में घाटा हुआ। वहीं 64 कंपनियां पांच साल से लगातार घाटे में ही हैं। मालूम हो कि 31 मार्च, 2020 को खत्म हुए वित्त वर्ष में 181 कंपनियों का कुल घाटा 1,55,060 करोड़ रुपये रहा था।
सीएजी की रिपोर्ट बताती है जिन 14 कंपनियों को 2019-20 में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ उनमें बीएसएनएल और एयर इंडिया भी शामिल रहीं। एयर इंडिया का निजीकरण हो गया है। वहीं केंद्र सरकार ने ओएनजीसी, एलआईसी,और पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड (पीपीएल) में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच दी है। इससे सरकार को लगभग 24,544 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें से 90 प्रतिशत से अधिक राशि एलआईसी से मिली है। वित्त वर्ष 2022-23 में, सरकार विनिवेश और निजीकरण के जरिए 65,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है।
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