दुबारा सरकार बनाने के बाद अब मोदी सरकार किसानों पर खास ध्‍यान दे रही है। जी हां किसानों की जरुरतों को ध्‍यान में रखते हुए सरकार एक और महत्‍वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। दरअसल केंद्र सरकार फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन को किसानों के स्वायल हेल्थ कार्ड से जोड़ने की योजना बना रही है। इसका मकसद खेती में यूरिया और पोषक तत्वों का वाजिब इस्तेमाल तय करना है। इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता बरकरार रखने में मदद मिलेगी।

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इस बारे में उवर्रक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मिट्टी के 85 प्रतिशत से अधिक नमूनों में नाइट्रोजन, 20 प्रतिशत में फास्फोरस और 15 प्रतिशत में पोटेशियम की कमी मिली है। किसानों को जल्द ही उनके जमीन के रिकॉर्ड में पोषक तत्वों की आवश्यक मात्रा के आधार पर फर्टिलाइजर (NPK) बेचा जाएगा।

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आपको बता दें कि सरकार ने फरवरी 2015 में स्वायल हेल्थ कॉर्ड (SHC) योजना शुरू की थी। इसमें किसानों को स्वायल हेल्थ कॉर्ड जारी किया जाता है, जिसमें किसानों के खेतों के लिए फसलवार आवश्यक पोषक तत्व और उवर्रक के सुझाव दिए जाते हैं। बता दें कि अब तक 14.5 करोड़ में से लगभग 11 करोड़ किसानों को कार्ड दिया जा चुका है।

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आपको बता दें कि इसमें से सबसे ज्यादा वृद्धि यूरिया के इस्तेमाल में हुई। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, जैविक खाद और रासायनिक उर्वरक के संतुलित इस्तेमाल से मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। इसके महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने बताया कि रासायनिक और जैविक खादों के संतुलित तरीके से इस्तेमाल करने पर पैदावार में 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।

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