नयी दिल्ली। ढेरों कंपनियां चीन से निकल कर भारत आने की तैयारी में हैं। दोनों देशों के बीच उपजे सीमा विवाद के मद्देनजर ये कंपनियां अपनी सुरक्षा के लिए भारत का रुख करने जा रही हैं। भारतीय कॉन्ट्रैक्ट निर्माताओं का कहना है कि कई ब्रांड्स की रुचि टीवी, एयर-कंडीशनर, माइक्रोवेव ओवन, जूते, स्पीकर, ईयर फोन, सेट-टॉप बॉक्स और परिधान जैसे प्रोडक्ट्स का उत्पादन कर भारत में करने को लेकर बढ़ रही है। इन कंपनियों को 'मेड इन चाइना' प्रोडक्ट्स के खिलाफ भारतीयों के विरोध और गलवान घाटी संकट के कारण चीन के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कदम के रूप में सरकार द्वारा आयात शुल्क में वृद्धि की संभावना का डर है। डिक्सन, वीडियोटेक्स इंटरनेशनल, एसएसआईपीएल जैसी कंपनियां कोरोना संकट के बाद से ही चीन से आयात पर अपनी निर्भरता कम करने पर ध्यान दे रही हैं। महामारी के कारण आयात में दिक्कतें आने लगीं थीं। मगर भारत-चीन के बीच मौजूदा तनाव को देखते हुए सरकार के 'वोकल फॉर लोकल' कार्यक्रम को बल मिला है।

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चीन का दखल रहेगा बरकरार

कंपनियों का कहना है कि चीन अभी भी कच्चे माल और कम्पोनेंट की सोर्सिंग में अहम किरदार निभाएगा क्योंकि कोई अन्य देश उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक रूप से नहीं बनाता है। इंडिया चाइना ट्रेड सेंटर के अध्यक्ष वीके मिश्रा के अनुसार कंपनियां भारत सरकार के फैसलों के अनुसार काम करेंगी। अगर सरकार आयात पर कुछ अतिरिक्त शुल्क लगाती है, तो फिर विकल्पों की तलाश की जाएगी। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री निकाय सीईएएमए के अध्यक्ष कमल नंदी का कहना है कि 30 फीसदी एयर-कंडीशनर और अधिकतर माइक्रोवेव ओवन भारत में आयात किए जाते हैं, जिनमें बड़ा हिस्सा चीन से आता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये स्थिति अगले साल तक बदल जाएगी क्योंकि कई निर्माता भारत में अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं।

भारत में बढ़ेगा प्रोडक्शन

वीडियोटेक्स इंटरनेशनल के निदेशक अर्जुन बजाज ने कहा कि टीवी कैटेगरी में नए प्रवेशकों सहित कई ब्रांड कॉन्ट्रैक्ट निर्माताओं के साथ स्थानीय उत्पादन शुरू करना चाहते हैं, जिससे रफ्तार और बढ़ेगी। कंपनी पहले से ही 15 टेलीविजन ब्रांडों के लिए डिजाइन और निर्माण करती है। यहां तक कि OnePlus और Realme जैसे चीनी ब्रांड भी भारत में ही अपने टीवी का प्रोडक्शन करेंगे। केंद्र चीन से आने वालों की सूची तैयार कर रहा है, जिसमें तैयार उत्पाद भी शामिल हैं, ताकि गलवान घाटी में सीमा तनाव के मद्देनजर उस पर अंकुश लगाया जा सके। सरकार आसियान देशों से मेड इन चाइना प्रोडक्ट्स के आने की भी जांच कर रही है, जो व्यापार समझौतों के खिलाफ है।

बढ़ी हुई लागत झेलने को तैयार

जूता निर्माता वुडलैंड इंडिया के प्रबंध निदेशक हरकीरत सिंह ने कहा कि जब वे चीन से विशेष फुटवियर का आयात करते है, लेकिन अब वे भारत सहित नए सोर्स की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इससे उत्पादन की लागत 5-10% बढ़ सकती है, लेकिन हम इसे झेल लेंगे। इस बीच, क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) उन श्रेणियों की सूची तैयार कर रहा है जिनका वे वर्तमान में चीन से आयात करते हैं और उन उत्पादों की पहचान कर रहे हैं जिनका उनके सदस्य भारत में उत्पादन बढ़ा सकते हैं या फिर भारत में ही उन चीजों के उत्पादन को शिफ्ट कर सकते हैं।