नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) भारत सरकार के फार्मास्युटिकल्स विभाग द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है। इस अभियान का मकसद प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के नाम से जाने जाने वाले विशेष केंद्रों के जरिए आम जनता को सस्ती कीमत पर क्वालिटी दवाइयाँ उपलब्ध कराना है। जेनेरिक दवाओं को उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेपीके) की स्थापना की गई है, जिन पर कम कीमत में बेहतर दवाएं मिलती हैं और ये आपको महंगे ब्रांडेड दवाओं के बराबर ही फायदा पहुंचाएंगी। ये जनऔषधि केंद्र आम जनता को सस्ती और अच्छी दवाई मुहैया करने के साथ-साथ अपना बिजनेस शुरू करने की सोच रहे लोगों के लिए एक अच्छा मौका भी है। अगर आप अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो जनऔषधि केंद्र एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है, क्योंकि इसमें आपको सरकार से आर्थिक मदद भी मिलेगी।
जनऔषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदन करने का प्रोसेस बहुत आसान है। इसके लिए आप ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए आप दिए गए लिंक (http://janaushadhi.gov.in/online_registration.aspx) पर जा सकते हैं। गौरतलब है कि जनऔषधि केंद्र पर आपको बहुत अधिक खर्च नहीं करना होगा। इससे भी अच्छी बात ये है कि जो आप खर्च करेंगे वो पैसा आपको सरकार से वापस मिल जाएगा।
जनऔषधि केंद्र पर आपको कमीशन से अच्छी कमाई होती है। यानी बिजनेस सेट करने के बाद आप हर महीने अच्छा पैसा कमा सकते हैं। टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 के शुरुआती 7 महीनों में ऐसे 6600 केंद्रों की बिक्री 358 करोड़ रुपये रही। पिछले साल इसी अवधि में ये 433 करोड़ रुपये रही थी। इस वित्त वर्ष में कुल बिक्री 600 करोड़ रु से अधिक रह सकती है।
केंद्र सरकार की तरफ से आपको जनऔषधि केंद्र खोलने पर पूरे 2.5 लाख रु की मदद मिलेगी। इन केंद्र पर दवा की सेल से आपको 20 फीसदी तक प्रोफिट होगा। साथ ही आपको हर महीने 15 फीसदी की प्रोत्साहन राशि (Incentive) भी मिलेगी। प्रोत्साहन राशि ज्यादा से ज्यादा 10 हजार रु ही मिलती है। ये राशि आपको 2.5 लाख रु पूरे होने तक मिलती रहेगी।
बता दें कि जन औषधि केंद्र तीन कैटेगरी में खोला जा सकता है। इनमें एक कैटेगरी है व्यक्तिगत, कोई बिना नौकरी वाला फार्मासिस्ट, डॉक्टर और रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिशनर की। वहीं दूसरी कैटेगरी में किसी ट्रस्ट, एनजीओ या सोसायटी आदि को जन औषधि केंद्र खोलने की सुविधा मिलती है। एक अन्य कैटेगरी में किसी राज्य सरकार की तरफ से नामित एजेंसी को जनऔषधि केंद्र खोलने की इजाजत मिलती है।
सरकार का ये खास अभियान सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए है। इन जनऔषधि केंद्रों के जरिए आम लोगों को मार्केट रेट के मुकाबले 90 फीसदी तक सस्ती मिल सकती हैं। ये एक बड़ा मार्जिन है। सितंबर 2015 में जन औषधि योजना को प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना के रूप में बदला गया। नवंबर 2016 में इस योजना को और गति देने के लिए फिर से प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का नाम दिया गया।
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