नयी दिल्ली। क्या आप बेरोजगार हैं या फिर नौकरी से बोर हो गए हैं और अपना बिजनेस शुरू करके खुद बॉस बनना चाहते हैं? अगर ऐसा है तो हम आपके लिए एक बेहतरीन आइडिया लेकर आए हैं। हर महीने आपके घर सिलेंडर कहां से आता है? जवाब है गैस एजेंसी से। आपने कभी सोचा है कि गैस एजेंसी किसकी होती है। अगर नहीं तो सोचिए, क्योंकि ये गैस एजेंसी आप भी खोल सकते हैं। ये एक ऐसा बिजनेस से जिसमें आपको पहले दिन से कमाई होगी। यहां हम आपको बताएंगे गैस एजेंसी की डीलरशिप लेने का तरीका।
गैस एजेंसी की डीलरशिप लेने से पहले आपके पास उससे जुड़ी सारी जानकारी होनी जरूरी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गैस कंपनियों की तरफ से डीलरशिप दी जाती है। ये कंपनियां अपने वितरण नेटवर्क का विस्तार करने के लिए शहरो में डीलरों की तलाश करती हैं और उसी आधार पर गैस एजेंसी की डीलरशिप देती हैं। गौरतलब है कि अगले साल मार्च तक गैस कंपनियों को और नए डिस्ट्रीब्यूटर्स चाहिए होंगे। यानी गैस एजेंसी डीलरशिप के लिए जल्द ही प्रोसेस शुरू हो सकती है। इसलिए आप भी पहले से तैयारी शुरू कर दें।
बताया जा रहा है कि गैस कंपनियां कुछ चुनिंदा राज्यों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इनमें यूपी, बिहार, बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र शामिल हैं। ध्यान रहे कि अगर आपको लाइसेंस मिल जाए तो गैस एजेंसी स्थापित करने में 1 साल का समय लग सकता है। इसकी वजह है कई मंजूरियों का हासिल करना, जिसमें कुछ मबीने लग सकते हैं। मगर एक बार ये सब हो जाने पर आपको तगड़ी कमाई का मौका मिलेगा।
सरकारी गैस कंपनियां (इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस) डीलरशिप के लिए विज्ञापन देती हैं। इन विज्ञापनों के जरिए इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे जाते हैं। इसके लिए आपको अखबार और इन कंपनियों की वेबसाइट पर ध्यान देना होगा। बल्कि नियमित रूप से चेक करते रहें। जब भी मौका मिले तब एक निश्चित फॉर्मेट में अप्लाई करें। इसकी पूरी गाइलाइन वेबसाइट पर मिल जाएगी। आखिर में लॉटरी सिस्टम से डीलरशिप दी जाती है। यानी जिसका नाम लॉटरी में आएगा उन्हें ही डीलरशिप मिलेगी।
कोई भी 10वीं पास व्यक्ति गैस एजेंसी के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि पहले इसके लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य था। मगर अब आप 10वीं पास होने पर भी गैस एजेंसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। दूसरी बात इसमें एक नियम आयु का है। अधिकतम 60 साल तक की आयु वाला व्यक्ति ही गैस एजेंसी के लिए अप्लाई कर सकता है। मगर इस नियम में भी बदलाव किया गया है। पहले अधिकतम आयु लिमिट 21 से 45 साल तक ही थी।
कंपनियों की तरफ से ‘फैमिली यूनिट' की परिभाषा भी बदली गई है। अब पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन के अलावा सौतेले भाई-बहिन, गोद लिया बच्चा, दामाद-भाभी, सास-ससुर और दादा-दादी को भी जोड़ा गया है। पहले इसमें आवेदक के अलावा पति-पत्नी और अविवाहित बच्चे ही थे। बहरहाल ये बिजनेस टिकाऊ है, जो आपको जीवन भर तगड़ी कमाई कराएगा।
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