देश में आज सुबह से ही आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ गया है। 7 जून से घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर देश के करोड़ों परिवारों पर पड़ेगा। भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों की समीक्षा करने के बाद यह फैसला लिया है। अब बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

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कीमतों में यह अचानक उछाल घरेलू बाजार में लंबे समय तक रही स्थिरता के बाद आया है। इससे पहले मार्च में सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए दाम घटाए थे। हालांकि, वैश्विक ऊर्जा बाजार में आए बदलावों और सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव की वजह से कीमतों में यह इजाफा करना पड़ा है। इस फैसले ने पिछले दिनों मिली राहत को काफी हद तक कम कर दिया है।

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दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में अब क्या हैं एलपीजी के दाम?

स्थानीय टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन खर्च की वजह से हर राज्य में सिलेंडर की नई कीमतें अलग-अलग होती हैं। दिल्ली में अब एक सिलेंडर की कीमत करीब ₹832 हो गई है, वहीं मुंबई में भी दरों में इजाफा हुआ है। कोलकाता और चेन्नई के निवासियों को अब और भी ज्यादा जेब ढीली करनी होगी, जहां कीमतें क्रमशः ₹858 और ₹847 के करीब पहुंच गई हैं। इस बढ़त ने मध्यमवर्गीय परिवारों को अपने किचन के बजट और खर्चों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

शहरनई एलपीजी दर (₹)पुरानी दर (₹)
नई दिल्ली832.00803.00
मुंबई831.50802.50
कोलकाता858.00829.00
चेन्नई847.50818.50

दिलचस्प बात यह है कि 1 जून को ज्यादातर इलाकों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में मामूली कटौती देखी गई थी। अक्सर डिमांड साइकिल के आधार पर कमर्शियल और घरेलू गैस की दरों में ऐसा अंतर देखने को मिलता है। जहां एक तरफ रेस्तरां चलाने वालों का खर्च थोड़ा कम हो सकता है, वहीं घर की रसोई पर इस महंगाई की सीधी मार पड़ी है। अब कामकाजी लोगों को अपने घर का बजट मैनेज करने के लिए और भी सावधानी बरतनी होगी।

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उज्ज्वला सब्सिडी और घरेलू बजट पर क्या होगा असर?

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी इस बढ़ी हुई कीमत के बोझ को थोड़ा कम जरूर करेगी। इसके बावजूद, बेस प्राइस में हुई इस बढ़ोतरी ने देशभर के कम आय वाले समूहों की चिंता बढ़ा दी है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब महंगाई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पहले से ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब उपभोक्ताओं की नजर तेल कंपनियों की अगली बैठकों पर टिकी है, ताकि भविष्य में कीमतों में होने वाले बदलावों या किसी संभावित राहत की जानकारी मिल सके।