कोंकण रेलवे ने आज यानी 15 जून से अपना सालाना मानसून टाइमटेबल लागू कर दिया है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह नया शेड्यूल 20 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा। महाराष्ट्र और गोवा के भारी बारिश वाले इलाकों से गुजरने वाली ट्रेनें अब पहले के मुकाबले धीमी रफ्तार से चलेंगी। यह बदलाव मुंबई, मडगांव और मंगलुरु के बीच पूरे तटीय रूट पर लागू होगा।

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इन चार महीनों के दौरान ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 120 किमी प्रति घंटे से घटाकर 75 किमी प्रति घंटे कर दी गई है। दरअसल, पश्चिमी घाट में भारी बारिश की वजह से अक्सर पटरियों पर लैंडस्लाइड या पत्थर गिरने का खतरा रहता है। रफ्तार कम होने से लोको पायलट किसी भी खतरे को समय रहते भांप सकेंगे और हादसों को टाला जा सकेगा। हालांकि, इस वजह से यात्रियों के सफर का समय दो से तीन घंटे तक बढ़ सकता है।

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कोंकण रेलवे मानसून सीजन: टाइमटेबल में हुए ये बड़े बदलाव

वंदे भारत और तेजस एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के शेड्यूल में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। मुंबई-मडगांव वंदे भारत अब हफ्ते में छह दिन के बजाय सिर्फ तीन दिन ही चलेगी। वहीं, मत्स्यगंधा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें अब मंगलुरु से अपने तय समय से पहले रवाना होंगी ताकि धीमी रफ्तार के बावजूद वे सही समय पर मुंबई पहुंच सकें।

पश्चिम और मध्य रेलवे ने भी अपने समय को इस खास शेड्यूल के हिसाब से एडजस्ट किया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) ऐप जरूर चेक कर लें। कई ट्रेनों के प्रस्थान समय (Departure time) में बदलाव हुआ है, इसलिए रियल-टाइम अपडेट लेना जरूरी है। आप IRCTC की वेबसाइट पर जाकर अपना PNR स्टेटस भी चेक कर सकते हैं।

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ट्रेन का प्रकारसामान्य रफ्तारमानसून में रफ्तार
एक्सप्रेस ट्रेनें110 kmph75-95 kmph
प्रीमियम (वंदे भारत)120 kmph75-95 kmph

यात्रियों के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स और सावधानियां

अगर आपको ट्रेन से उतरने के बाद आगे की फ्लाइट या बस पकड़नी है, तो कम से कम चार घंटे का मार्जिन (Buffer period) लेकर चलें। पीक सीजन में पनवेल या ठाणे जैसे स्टेशनों पर ट्रेनों के देरी से पहुंचने की संभावना बनी रहती है। नुकसान से बचने के लिए फ्लेक्सिबल टिकट बुक करना ही समझदारी होगी। भारी बारिश की वजह से कभी-कभी ट्रेनों को बीच में ही रोकना या उनके समय में अचानक बदलाव भी करना पड़ सकता है।

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यात्रियों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में स्पेशल स्टाफ 24 घंटे निगरानी कर रहा है। सफर के दौरान सभी सेफ्टी सिग्नल्स का पालन करें और खुले दरवाजों के पास खड़े होने से बचें। मानसून के दौरान आपकी सुरक्षा रफ्तार से कहीं ज्यादा जरूरी है। अपनी यात्रा की प्लानिंग सावधानी से करें और कोंकण तट की खूबसूरती का सुरक्षित आनंद लें।