नयी दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2019-20 में और 21,246 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए संसद की मंजूरी मांगी है। सरकार यह खर्च चालू वित्त वर्ष के लिए तय बजट व्यय के ऊपर खर्च करने की योजना बना रही है। इनमें से 18,995 करोड़ रुपये सरकार के नेट कैश में से खर्च किये जायेंगे, जबकि 2,249 करोड़ रुपये विभिन्न सरकारी विभागों की बचत या बिना उपयोग हुए पैसे से पूरे किये जायेंगे। इनमें आधिकारिक तौर पर 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर राज्य से बाहर कर दिये गये जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 8,821 करोड़ रुपये दिए जाने की मांग की गई है। बता दें कि यह राशि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्यों के टैक्स मे हिस्से के हिसाब से माँगी गयी है। इनमें नवंबर और दिसंबर के लिए टैक्स की शुद्ध आय का इनका अपना हिस्सा भी शामिल है।
कहाँ खर्च करेगी सरकार?
संसद के निचले सदन में पेश किये गये स्टेटमेंट के मुताबिक सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सरकारी बीमा कंपनियों में 25 अरब रुपये की पूँजी डालने की भी योजना बनायी है। सरकारी बीमा कंपनियों में भारतीय जीवन बीमा निगम, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया शामिल हैं। इसके अलावा बॉन्ड्स के जरिये आईडीबीआई बैंक को भी 45.57 अरब रुपये की आर्थिक मदद दी जायेगी। इसके अलावा सस्ते मकानों और मध्यम आय वाले लोगों को घरों के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किये जायेंगे। इन पैसों के लिए एक स्पेशल विंडो तैयार की जायेगी।
अंतरिक्ष और पुलिस विभाग पर भी होगा खर्च
21,246 करोड़ रुपये में से 666 करोड़ रुपये अंतरिक्ष विभाग के खर्चों को पूरा करने के लिए आवंटित किये जायेंगे। वहीं पुलिस के वेतन और उनके राशन के खर्चों के लिए 3,387.46 करोड़ रुपये आवंटित किये जायेंगे। इसके अलावा गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन के लिए शुरू की योजना के तहत अतिरिक्त फंडिंग के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की मांग की गई है। गौरतलब है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच सरकार के कॉर्पोरेट कर दरों में कटौती और जीएसटी संग्रह में कमी ने इस साल सरकार की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है।
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