What is the controversy over the disappearance of Rs 500 notes: कल यानी शनिवार को एक आरटीआई एक्टिविस्ट मनोरंजन रॉय ने आरटीआई के हवाले से 500 रुपये के करीब 88,000 रुपये के नोट गायब होने की जानकारी साझा की थी। लेकिन एक दिन बार ही आरबीआई ने कुछ और कहा है। लेकिन यह मामला क्या है, और क्यों शुरू हुआ है यह विवाद, यह जानना काफी जरूरी है।

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दरअसल कल आरटीआई एक्टिविस्ट मनोरंजन रॉय बताया था कि नए डिजाइन वाले 500 रुपये के लाखों नोट गायब हैं। इनकी वैल्यू 88,032.5 करोड़ रुपये है। उन्होंने यह दावा आरबीआई में लगाई एक आरटीआई के बाद किया था।

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उनका कहना है कि आरबीआई के जबाव में बताया गया है कि देश के 3 प्रिंटिंग प्रेस ने नए डिजाइन वाले 500 रुपये के 8810.65 मिलियन नोट छापे। बाद में रिजर्व बैंक को इनमें से 7260 मिलियन नोट ही मिले। कुल मिलाकर 500 रुपये के 1760.65 मिलियन नोट गायब हुए। इनकी वैल्यू कुल मिलाकर 88,032.5 करोड़ रुपये है। आरबीआई बेंगलुरु, देवास और नासिक में स्थित अपने प्रिंटिंग प्रेस में यह नोट छापता है।

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वहीं अब आरबीआई ने इस खबर को गलत बताया है। आरबीआई का कहना है कि आरटीआई में दी जानकारी का गलत मतलब निकाला गया है। आरबीआई ने एक रिलीज में बताया कि आरटीआई से मिली सूचना की गलत व्याख्या के कारण ऐसा हुआ है।

आरबीआई का कहना है कि प्रिंटिंग प्रेस से आरबीआई को दिए जाने वाले एक-एक नोट की गिनती होती है। इसके लिए एक मजबूत व्यवस्था है। आरबीआई ने साथ ही लोगों को सलाह दी है कि वे इस तरह के मामलों में केवल रिजर्व बैंक की तरफ से दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें।

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आरबीआई ने कहा है कि जो भी नोट प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं, वो पूरी तरह सिक्योर होते हैं। आरबीआई की ओर से पूरे प्रोटोकॉल के साथ इन बैंक नोट्स के प्रोडक्शन, स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन की मॉनिटरिंग की जाती है और इसके लिए मजबूत सिस्टम बना हुआ है।