Success Story : देश में कई सारे ऐसे लोग है जो पुराने मोबाइल को खरीदते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण इसका कम कीमत में मिलना और एक अच्छा फोन मिलना है। इसी वजह से लोग कई सारे ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में पुराने फोन की तलाश करते रहते है। आज के समय भारत में पुराने फोन को ठीक करके बेचने का बिजनेस तेजी से बढ़ा है। इसी कारोबार के माध्यम से दिल्ली का एक युवा उद्यमी मोबाइल मार्केट में अपना नाम बना रहा है।

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वैसे तो इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स खराब हो जाते है तब ये ई-कूड़ा हो जाते हैं लेकिन, दिल्ली स्थित स्टार्टअप जोबॉक्स इन पुराने मोबाइल को रीफर्बिश करके उन्हें उपयोग के लिए नए सिरे से तैयार करता है। आज हम आपको इस स्टार्टअप के फाउंडर की सफलता की कहानी बताने जा रहे है तो फिर आइए जानते हैं इसके बारे में।

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दिसंबर 2020 में नीरज चोपड़ा ने जोबोक्स की शुरूआत की थी। उन्होंने जिस तेजी से इस कारोबार में अपनी सफलता पाई उसके पीछे सालों का संघर्ष और अनुभव उनके काम आया। नीरज केवल 19 वर्ष की आयु में वर्ष 2000 में हॉन्गकॉन्ग चले गए। नीरज ने यह पर लगभग 12 वर्ष बिताए और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के कारोबार का अनुभव हासिल किया।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हालांकि, नीरज को वर्ष 2012 में उन्हें पारिवारिक वजहों से भारत वापस लौटना पड़ा। चूंकि उनके पास मोबाइल बाजार का काफी बेहतर अनुभव था इसी वजह से नीरज चोपड़ा ने दिल्ली में मोबाइल पावर बैंक का कारोबार शुरू कर दिया है। वे इसी बीच ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें पुराने मोबाइल के बिजनेस का आइडिया मिला।

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नीरज के पास रिपेयरिंग और सप्लाई चैन आदि का आइडिया था जो उनके लिए इस कारोबार में काफी अहम साबित हुआ। जिसके बाद उन्होंने पुराने मोबाइल को रीफर्बिश करने का बिजनेस शुरू किया।

नीरज को इन पुराने मोबाइल को बेचने के लिए एक खास प्लेटफार्म या फिर शॉप की आवश्यकता थी। इसी वजह से नीरज ने कुछ शो रूम ओपन किए, लेकिन ये शो रूम उन्हें काफी महंगे पड़े। नीरज जिसके बाद अपना ब्रांड को लॉन्च करने का मन बनाने लगे लेकिन इस दौरान 2020 के दौरान कोरोना महामारी आ गई और लॉकडाउन लग गया।

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हालांकि, नीरज चोपड़ा ने वर्ष 2020 में जोबॉक्स रिटेल्स प्रा. लिमिटेड नाम से कंपनी रजिस्टर की। इसके बाद नीरज का बिजनेस तेजी से बढ़ने लगा। एक वक्त था जब वे हर दिन 100 मोबाइल ही सेल कर पाते है लेकिन वे आज के समय में रोजाना करीब 20 हजार से 25 हजार मोबाइल बेचते हैं। उन्होंने दिल्ली के करोलबाग में पुराने मोबाइल को रिपेयर करने के लिए रिफर्बिशमेंट यूनिट लगाई।

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नीरज की कंपनी ई-कॉमर्स कंपनियों से पुराने मोबाइल खरीदकर उन्हें रिफर्बिशमेंट करके नया लुक देती है। इसके बाद ये जो मोबाइल होते है इन मोबाइल को ऑनबोर्ड वेंडर्स की सहायता से सेल किया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज के समय में नीरज की कंपनी का टर्नओवर करीब 50 करोड़ रु है।