Success Story: आज के वक्त में मालाबार गोल्ड एक नामचीन ब्रांड है, इसके फाउंडर एमपी अहमद के भी हौसले बचपन से ही बुलंद थे, इसी वजह से उन्होंने 20 वर्ष की आयु में ही अपना मसालों का कारोबार शुरू किया, लेकिन उन्हें कारोबार में सफलता नहीं मिली।

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इसके बाद उन्होंने बाजार रिसर्च के और तब उन्होंने पाया कि सोने और ज्वेलरी का आगे चलकर बहुत स्कोप हैं। इसी बिजनेस को उन्होंने चुना और उनकी कंपनी मालाबार गोल्ड एक ब्रांड बन चुका है।

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नवंबर 1957 को एमपी अहमद का जन्म 1 केरल के कोझिकोड में हुआ था। उनके पिता मम्माद कुट्टी हाजी थे और माता का नाम फातिमा था। उनका ऐसे परिवार में जन्म हुआ था, जो छोटा मोटा कारोबार करता है।

इसी वजह से अहमद के मन में छोटे पन से ही बिजनेस करने की ललक थी। अहमद की स्कूली शिक्षा कोझिकोड के सरकारी स्कूल से हुई, उन्होंने इसके बाद कालीकट विश्वविद्यालय से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया।

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कोई भी कारोबार शुरू करने का एक नियम होता है कि पहले मार्केट की रिसर्च कर लेना चाहिए। इस बारे में अहमद बेहतर तरह से जानते थे, इसी कारण अगले कारोबार को शुरू करने से पहले उन्होंने अपने अपने आसपास मार्केट रिसर्च की।

उन्होंने इस दौरान कई कारोबार के बारे में विचार किया। अहमद ने बाजार रिसर्च के दौरान पाया कि मालाबार में कोई त्यौहार हो या किसी को इन्वेस्टमेंट करना हो, तो वहां के लोग सोना खरीदते हैं।

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उन्होंने तब खुद का ज्वेलरी का कारोबार शुरू करने का निर्णय लिया और इस तरह से मालाबार गोल्ड का विचार जन्म ले चुका था।

मालाबार गोल्ड का विचार तो जन्म ले चुका था, लेकिन अब आवश्यकता थी उसे शुरू करने के लिए लगने वाली पूंजी की। अहमद ने इसके लिए अपने कुछ रिश्तेदारों को राजी किया, उन्होंने इसके साथ ही अपनी प्रॉपर्टी को बेचकर 50 लाख रु जुटाए।

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वर्ष 1993 में अहमद ने इस पैसों से कोझिकोड में 400 वर्गफुट की एक शॉप लेकर अपना कारोबार शुरू किया। यह पर अहमद सोने की ईंटे खरीदते और अपने कारीगरों की मदद से खुद ज्वेलरी बनाते। उनकी यूनिक डिजाइन और वैरायटी के वजह से जल्द ही लोगों के बीच में मालाबार गोल्ड फेमस होने लगी।

उनका कारोबार दिनों दिन तरक्की करने लगा, वे एक के बाद एक स्टोर खोलने लगे। वे वर्ष 1999 में बीआईएस हॉलमार्क वाली ज्वेलरी बेचने लगे। आज मालाबार गोल्ड के भारत के अलावा यूएई, दुबई, अमेरिका सहित 11 देशों में स्टोर्स हैं और यह कंपनी 27,000 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी बन गयी है।

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