नयी दिल्ली। किसानों को बेहद कम ब्याज दर पर लोन मुहैया करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लॉन्च किया गया था। केसीसी कोई नई नहीं बल्कि 1998 की योजना है। हालांकि 22 सालों बाद भी केवल 58 फीसदी किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं। 42 फीसदी किसान इस खास लोन स्कीम से बाहर हैं। उन्हें लोन के लिए गांवों के साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि सरकार ने ज्यादा से ज्यादा किसानों को केसीसी का फायदा देने के लिए कई प्रयास किए हैं। इतना ही नहीं सरकार ने मछली पालन में लगे लोगों को भी केसीसी का लाभ देने का फैसला लिया। इसी के तहत यूपी सरकार ने राज्य के 1 लाख मछली पालकों को केसीसी देने का ऐलान किया है। 1 लाख मछली पालकों को 10 अक्टूबर तक केसीसी दिया जाएगा।
गौरतलब है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग केसीसी का फायदा उठा सकें इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से पशुपालन और मछली पालन में लगे लोगों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। केसीसी पर बिना गारंटी आपको 1.6 लाख रु तक का लोन मिल सकता है। वैसे इस पर लोन लिमिट 3 लाख रु है। यूपी की योगी सरकार किसानों को केसीसी का फायदा देने के लिए बकायदा अभियान चला रही है। इसमें मछली पालक भी शामिल हैं। 1 लाख मछली पालकों को राज्य सरकार ने केसीसी देने का आह्वान किया है। इससे उन्हें भी बिना गारंटी 1.6 लाख रु तक का लोन मिल सकेगा। राज्य सरकार ने इस योजना का लाभ पहुंचाने के लिए अधिकारियों को आदेश भी दे दिया है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार पूरे यूपी में 38 लाख मछुआरे हैं। इनमें 1.40 लाख एक्टिव मछली पालक शामिल हैं, जबकि पट्टे पर लगे 73,909 मछली पालक हैं। फिलहाल मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने 1 लाख मछली पालकों के केसीसी बनाने का लक्ष्य रखा है। यूपी के मत्स्य विभाग की तरफ से सभी जिलों में केसीसी बनाने का आदेश दिया गया है। हर जिले के 1 लाख केसीसी में अपने-अपने लक्ष्य हैं, जिन्हें मंडल के आधार पर तैयार किया गया है।
राज्य में जो मछुआरे केसीसी का लाभ ले सकते हैं उनमें एक्वाकल्चर मछुआरे, (व्यक्तिगत या समूहिक या साझेदारी आधार पर मछली पालने वाले या इस तरह के काम में लगे स्वयं सहायता समूह शामिल हैं। ध्यान रहे कि यदि कोई मछली पालक केसीसी लेना चाहता है तो उसके पास तालाब, किसी जल निकाय, टंकी, पालन इकाई जैसे किसी मछली पालन और मछली पकड़ने की गतिविधि के लिए लाइसेंस होना जरूरी है। साथ ही उसका मछली पालन से जुड़ी हुई गतिविधियों में किसी का मालिक होना भी जरूरी है।
केसीसी पर लिये जाने वाले लोन पर 9 फीसदी ब्याज दर होती है। मगर सरकार किसानों को इसमें 2 फीसदी की सब्सिडी देती है। इस तरह केसीसी के लोन पर ब्याज की दर 7 फीसदी रहती है। मगर यदि किसान 1 साल के अंदर ही पैसा लौटा दें तो उन्हें 3 फीसदी छूट और मिलेगी। ऐसे में लोन पर ब्याज की दर रह जाएगी सिर्फ 4 फीसदी। बैंकों से सीधे लोन पर किसानों को 8-9 फीसदी ब्याज चुकाना पड़ता है।
More Articles
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?
- ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान