नई दिल्ली, अगस्त 20। कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने भारत में श्रम सुधार के लिए जल्द ही चार नए लेबर कोड लागू करने वाली है। इसकी लिखित जानकारी श्रम राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने लोकसभा में दी है। बहुत से राज्यों ने विभिन्न कोड्स पर अपनी सहमति दी है। केंद्र सरकार जल्द ही इसे लागू कर सकती है।
आपको बता दे नए लेबर कोड्स के लागू होने के बाद छुट्टी, प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी और कर्मचारियों की सैलरी में बदलाव आएगा। इसके तहत कार्य करने के घंटे और हफ्तों में बदलाव आएगा। उसके बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के लिए किसी भी संस्थान में 5 वर्ष तक लगातार नौकरी की बाध्यता नहीं रहेगी। इसका ऐलान सरकार की तरफ से अभी तक नही किया गया है। मगर लेबर कानून लागू होते ही ये नियम लागू जो जायेगा।
किसी भी संस्थान में अभी ग्रेच्युटी के नियम के तहत 5 वर्ष पूरे होने पर ही ग्रेच्युटी बनती है। इस नियम के अनुसार 5 वर्ष पूरे होने के बाद आप जिस दिन कंपनी को छोड़ देते है। उस महीने में आपकी जितनी सैलरी होगी उसके आधार पर ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन किया जाता है। अगर किसी कर्मचारी ने एक संस्थान में 10 वर्ष काम किया है तो आखिरी महीने में उसके खाते में 50 हजार रूपये आते है। अब उसकी बेसिक सैलरी 20 और 6 हजार डियरनेस अलाउंस है तब उसके ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन 26 हजार के आधार पर होगा।
सोशल सिक्योरिटी बिल में है ग्रेच्युटी का जिक्र सिक्योरिटी बिल, 2020 के चैप्टर 5 में ग्रेच्युटी के नियम की जानकारी दी गई है। दरअसल, कंपनी से किसी भी कर्मचारी को मिलने वाला इनाम ग्रेच्युटी होता है। नौकरी की शर्तो को यदि कोई कर्मचारी पूरा करता है तो फिर उसे निर्धारित फार्मूले के तहत गारंटी से ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है। कर्मचारी के वेतन से ग्रेच्युटी का एक छोटा हिस्सा काट लिया जाता है। लोकसभा में दाखिल ड्राफ्ट कॉपी में दी गई जानकारी के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी किसी संस्थान में 1 वर्ष में नौकरी कर लेता है तो वह ग्रेच्युटी का हकदार हो जाएगा।
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