नयी दिल्ली। जानलेवा कोरोनावायरस इंसानों के साथ-साथ कारोबारी सेक्टरों को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। भारत में विदेशों से आयात मुश्किल होता जा रहा है। चीन के बाद दक्षिण कोरिया पर भी इसका असर दिखने लगा है। दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग की भारत में सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी जियो भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि सैमसंग जियो की 4जी नेटवर्क वेंडर है। इसी के चलते जियो मल्टी-वेंडर रणनीति पर विचार कर रही है। सैमसंग दक्षिण कोरिया में फैल रहे घातक कोरोनावायरस के कारण बिना रुके आपूर्ति सुनिश्चित करने में कमजोर हो सकती है। बता दें कि कोरोनावायरस के कारण चीन में भी बहुत सारी चीजों का प्रोडक्शन लगभग बंद हो गया है, जिससे भारत में उन सामानों की किल्लत हो रही है और कीमतों में इजाफा हो रहा है।
वहीं जियो के प्रतिद्वंद्वियों यानी वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल, जो चीन के हुआवेई और जेडटीई से नेटवर्क का कुछ हिस्सा खरीदती हैं, अगर एरिक्सन और नोकिया जैसे यूरोपीय वेंडर से अपनी कमी को पूरा करने के लिए नेटवर्क की खरीदारी करती हैं तो इनकी खरीद लागत में अगली कुछ तिमाहियों में कम से कम 25 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे होगा ये कि जब तक वे बढ़ी हुई लागत का भार ग्राहकों पर नहीं डालेंगी तब तक उनकी पूँजीगत योजनाओं पर दवाब बढ़ेगा। इन दोनों कंपनियों पर पहले से ही एजीआर का बकाया बाकी है।
भारती एयरटेल और वोडाफोन के पास कई नेटवर्क वेंडर हैं, मगर जियो केवल दक्षिण कोरियाई आपूर्तिकर्ता सैमसंग से नेटवर्क गियर खरीदती है। कुछ समय पहले तक, विश्लेषकों ने कहा था कि कोरोनोवायरस से जियो बिल्कुल प्रभावित नहीं होगी क्योंकि यह चीनी उपकरणों का उपयोग नहीं करती। लेकिन दक्षिण कोरिया में इस वायरस के फैलने से अब स्थिति बदल गई है। हालांकि टेलीकॉम कंपनियों ने चीनी विक्रेताओं की तरफ से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण गियर खरीद लागत या कैपेक्स में एक दम से किसी बड़ी उछाल की संभावना को खारिज किया है।
हाल ही में सामने आयी एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोनावायरस के कारण दुनिया की इकोनॉमी में 1.1 लाख करोड़ डॉलर या 78.79 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आ सकती है। ये पूरी दुनिया की इकोनॉमी का 1.1 फीसदी होगा। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के विश्लेषण के अनुसार अगर कोरोनावायरस एक वैश्विक महामारी में बदला तो दुनिया की इकोनॉमी में 78.79 लाख करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। वहीं अगर ये बीमारी सिर्फ एशिया तक सीमित रह जाये तो वैश्विक जीडीपी में 0.5 फीसदी यानी 40,000 करोड़ डॉलर की गिरावट आयेगी।
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