देशभर में लाखों टैक्सपेयर्स इस समय आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग की तैयारी कर रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने फाइलिंग की आखिरी तारीख 15 सितंबर तय की है। ऐसे में सभी लोग समय पर रिटर्न भरने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन केवल रिटर्न फाइल कर देना ही काफी नहीं है, उसे वेरिफाई करना भी उतना ही जरूरी है। अगर रिटर्न वेरिफाई नहीं हुआ तो उसे अमान्य माना जाएगा और आगे की प्रक्रिया रुक सकती है।
क्यों जरूरी है ITR वेरिफिकेशन?
ITR फाइल करने के बाद 30 दिन के अंदर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। अगर यह तय समय सीमा में नहीं किया गया तो रिटर्न मान्य नहीं रहेगा। इसका सीधा असर रिफंड पर पड़ेगा और टैक्सपेयर को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ सकती है। कई बार लोग सोचते हैं कि सिर्फ फॉर्म भर देने से काम पूरा हो गया, लेकिन असली प्रोसेस वेरिफिकेशन से ही शुरू होती है।
रिटर्न प्रोसेसिंग में क्यों लगता है समय?
रिटर्न वेरिफाई होने के बाद इनकम टैक्स विभाग उसमें दी गई जानकारी की जांच करता है। इस दौरान यह देखा जाता है कि आपने जितनी इनकम दिखाई है, वह 26AS और AIS यानी Annual Information Statement के आंकड़ों से मेल खाती है या नहीं। अगर सभी डिटेल सही हों तो रिटर्न जल्दी प्रोसेस हो जाता है। लेकिन जैसे ही कैपिटल गेन, बिजनेस इनकम या कठिन निवेश शामिल होते हैं, प्रोसेसिंग लंबी हो सकती है।
किसका रिटर्न जल्दी प्रोसेस होता है?
सैलरी या पेंशन पाने वाले लोग जो ITR-1 फाइल करते हैं, उनका रिटर्न मुकाबले जल्दी प्रोसेस हो जाता है। जबकि म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट या प्रॉपर्टी से कैपिटल गेन दिखाने वाले टैक्सपेयर्स का रिटर्न देर से प्रोसेस होता है। इसका कारण है इनकम और टैक्स कटौती का सही मिलान करने में समय लगना।
देरी के सामान्य कारण
फॉर्म 26AS और AIS में दिखाए गए आंकड़ों का मेल न खाना।
बैंक खाते की जानकारी गलत दर्ज करना।
पैन और आधार कार्ड की डिटेल में गड़बड़ी।
TDS की रकम में अंतर आना।
इनमें से कोई भी गलती प्रोसेसिंग को हफ्तों या महीनों तक खींच सकती है।
अगर नोटिस मिले तो क्या करें?
कभी-कभी टैक्स डिपार्टमेंट इनकम और निवेश से जुड़ी गड़बड़ी पर टैक्सपेयर को नोटिस भेज देता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने एफडी से ब्याज की आय को रिटर्न में नहीं जोड़ा तो नोटिस आ सकता है। ऐसी स्थिति में रिटर्न को सही करना और अपडेटेड डिटेल देना जरूरी है।
गलती से बचने के उपाय
हर साल बैंक से ब्याज का सर्टिफिकेट लेकर रिटर्न में शामिल करें।
AIS में दिए गए आंकड़े चेक करके उन्हें सही ढंग से भरें।
चाहें तो 'रिसीट बेसिस' पर एफडी की इनकम मैच्योरिटी पर दिखा सकते हैं।
ITR रिजेक्ट भी हो सकता है
अगर रिटर्न में बड़ी गलती पाई जाती है तो विभाग 'डिफएक्टिव रिटर्न' का नोटिस भेजता है। टैक्सपेयर को उसे सही करने का मौका दिया जाता है। अगर समय पर सुधार नहीं किया गया तो आईटीआर रिजेक्ट भी किया जा सकता है।
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