भारत अब सिर्फ सोलर और विंड एनर्जी पर ही नहीं, बल्कि न्यूक्लियर एनर्जी के भविष्य पर भी बड़ा दांव खेल रहा है। सरकार ने 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी Small Modular Reactors (SMR) चालू करने का लक्ष्य रखा है। माना जा रहा है कि यह मिशन देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और साथ ही कई इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए नए बिजनेस अवसर भी लेकर आएगा।

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Small Modular Reactor (SMR) पारंपरिक न्यूक्लियर पावर प्लांट की तुलना में आकार में छोटे, अधिक सुरक्षित और कम लागत वाले रिएक्टर होते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके कई महत्वपूर्ण हिस्से पहले फैक्ट्री में तैयार किए जा सकते हैं और बाद में जरूरत के हिसाब से साइट पर इंस्टॉल किए जाते हैं।

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न्यूक्लियर एनर्जी की अहम भूमिका-

सरकार का फोकस सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन, मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी सेक्टर की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में न्यूक्लियर एनर्जी की अहम भूमिका मानी जा रही है। ऐसे में SMR मिशन से हेवी इंजीनियरिंग, हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए बड़े बिजनेस अवसर बन सकते हैं।

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BHEL सबसे बड़ा खिलाड़ी-

इस थीम में सबसे पहले BHEL का नाम सामने आता है। कंपनी लंबे समय से भारत के न्यूक्लियर कार्यक्रम का हिस्सा रही है और स्टीम जनरेटर, टरबाइन और कई महत्वपूर्ण उपकरण तैयार करती है। अगर SMR प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ते हैं, तो कंपनी को बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

L&T पर निवेशकों की नजर-

इसके अलावा Larsen & Toubro (L&T) भी इस सेक्टर की बड़ी खिलाड़ी है। कंपनी रिएक्टर प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर और बड़े न्यूक्लियर इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। वहीं, MTAR Technologies हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग के लिए जानी जाती है और न्यूक्लियर रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले कई अहम कंपोनेंट्स तैयार करती है।

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HCC और Kirloskar पर दांव-

Hindustan Construction Company (HCC) भी न्यूक्लियर प्लांट्स के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। किसी भी न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में जटिल सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है और HCC पहले भी कई न्यूक्लियर परियोजनाओं में काम कर चुकी है। इसके अलावा Kirloskar Brothers न्यूक्लियर रिएक्टरों के लिए स्पेशल पंप और फ्लूइड मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करती है। एसएमआर परियोजनाओं के विस्तार के साथ ऐसे उपकरणों की मांग बढ़ सकती है।

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कुल मिलाकर, भारत का SMR मिशन आने वाले दशक की सबसे बड़ी एनर्जी स्टोरी बन सकता है। अगर सरकार अपने तय लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो न्यूक्लियर सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। ऐसे में BHEL, L&T, MTAR Technologies, HCC और Kirloskar Brothers जैसे शेयर निवेशकों की वॉचलिस्ट में बने रह सकते हैं।

[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]