Infosys Layoffs: इंफोसिस ने हाल ही में मैसूर कैंपस से लगभग 300 से 400 ट्रेनी को निकाल दिया था। इसके बाद से ही ये कंपनी विवादों में घिर गई है। ये ट्रेनी लगातार तीन बार इवैल्यूएशन टेस्ट में फेल हो गए थे जिसके बाद कंपनी ने ये फैसला लिया। इन ट्रेनी को ढाई साल के लंबे इंतजार के बाद नियुक्ति मिली थी।

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अब ये विवाद इतना आगे बढ़ गया है कि यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एंप्लॉयमेंट ने दूसरा लेटर कर्नाटक लेबर कमिश्नर को भेजा है और इंफोसिस मैसूर ऑफिस से निकाले गए ट्रेनी वाले मामले की गहन से जांच करने की मांग की है।

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100 से अधिक इंफोसिस ट्रेनी हुए प्रभावित (Infosys News)

मनीकंट्रोल के अनुसार, 25 फरवरी के लेटर में इस बात की जानकारी देते हुए लिखा है, "आपसे अनुरोध है कि आप मामले की जांच करें। एप्लीकेंट्स और इस ऑफिस दोनों को सूचित करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का भी निर्देशन दिया गया है।

ये एप्लीकेंट्स पुणे स्थित IT कर्मचारी, यूनियन नैसेंट इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एनआईटीईएस) के साथ-साथ 100 से अधिक प्रभावित पूर्व इंफोसिस कर्मचारी हैं, जिन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ लेबर ने कर्नाटक लेबर कमिश्नर को इस मामले में की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।

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केंद्रीय लेबर मिनिस्ट्री की ओर से आया था ये मेल (Infosys Trainee Layoffs )

13 फरवरी को मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कर्नाटक के लेबर डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने ट्रेनी की छंटनी की रिपोर्ट के बाद पूरी स्थिति का आकलन करने के लिए बेंगलुरु और मैसूर में इंफोसिस के ऑफिस का दौरा किया था। इससे पहले केंद्रीय लेबर मिनिस्ट्री की ओर से एक मेल आया था, जिसमें कर्नाटक के लेबर कमिश्नर और लेबर सेक्रेटरी को मामले की जांच करने और विवाद को हल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

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इंफोसिस ने दी ये जानकारी

वहीं, कंपनी के अधिकारियों ने इसपर अपना पक्ष स्पष्ट किया है और कहा है कि कंपनी ने अपने हाई क्वालिटी को मेंटेन करने के लिए खराब पर्फार्मेंस वाले कर्माचरियों को जॉब से निकाला है। चीफ लेबर कमिश्नर (सी) ऑफिस के द्वारा जारी यह लेटर पीएमओ को भेजी गई अनेक शिकायतों के जवाब में आया है। एनआईटीईएस ने 26 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी जिसमें कई प्रभावित कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा किए। इसमें कुछ ट्रेनी ये तक आरोप भी लगाया कि इंफोसिस ने उन्हें यह नहीं बताया गया कि एसेसमेंट में गलत उत्तर देने पर नेगेटिव मार्किंग होगी। इतना ही नहीं, ट्रेनियों ने ये भी कहा कि उन्हें कंपनी से निकाले जाने के बाद रिलीविंग लेटर भी नहीं मिला।

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कंपनी कराती है अलग-अलग प्रोग्राम

एनआईटीईएस के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने आरोप लगाया कि 2024 में कर्नाटक राज्य श्रम मंत्रालय ने शिकायतों में कर्मचारियों के नाम न होने का हवाला देकर इंफोसिस को बचाने की कोशिश की होगी।

इन सभी आरोप पर कंपनी ने अपना बयान दिया कि इंफोसिस कर्माचरियों की क्वालिटी पर गर्व करता है और इसके लिए वह अलग-अलग प्रोग्राम भी कराता रहता है। ये प्रोग्राम लागत पूरी तरह से इंफोसिस द्वारा किए जाते है। मूल्यांकन नीति डॉक्यूमेंट में स्पष्ट रूप से इसके बारे में बताया गया है और सभी ट्रनी जो कंपनी ज्वाइंन करते हैं उन्हें भी ये जानकारी दी जाती है। साथ ही, एसेसमेंट प्रोसेस के हिस्से के रूप में, तीनों प्रयासों में नेगेटिव मार्किंग होती है जब मल्टीपल चॉइस प्रश्न होते हैं। इसके अलावा, सभी पात्र ट्रनी (98% से अधिक) को अलग होने पर उनका रिलीविंग लेटर मिल गया है, साथ ही आउटप्लेसमेंट सर्विस, सिवरेंस पे, काउंसलिंग की जानकारी भी शेयर की गई है।