Infosys Joining Delay News: दिग्गज आईटी कंपनी Infosys फ्रेशर्स की ऑनबोर्डिंग में देरी कर रही है जिसके कारण इस कंपनी को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

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इससे कुछ समय पहले विप्रो, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों ने भी ऑनबोर्डिंग में देरी की थी। सेलेक्टेड कैंडिडेट्स की ऑनबोर्डिंग में देरी करने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

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जल्दी समाधान करने के लिए लगाया जोर

NITES(Nascent Information Technology Employees Senate) ने हाल ही में फ्रेशर्स के संघर्षों को उजागर किया और सही समयसीमा बताने का आग्रह किया है। अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने तनाव और कामकाज पर जोर देते हुए शीघ्र समाधान का आग्रह किया।

टेक इंडस्ट्री की एक प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस इस मुश्किल दौर से गुजर रही है। फ्रेशर्स के लिए जॉइनिंग और ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को स्थगित करने को लेकर कंपनी की आलोचना हो रही है।

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नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट ने उन समस्याओं पर प्रकाश डाला है, जिनसे फ्रेशर्स ऑनबोर्डिंग प्रोसेस में देरी हो रही हैं।

उन्होंने इंफोसिस से स्पष्ट ऑनबोर्डिंग टाइमलाइन प्रदान करने के लिए कहा है। NITES के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने छात्रों द्वारा अपनी जॉइनिंग डेट की प्रतीक्षा करते समय झेलेने वाले तनाव के स्तर पर जोर दिया।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि लंबे समय तक देरी ने उनकी योजनाओं में परेशानी पैदा की है और इंफोसिस को निश्चित जॉइनिंग डेट और सही सपोर्ट प्रदान करके समस्याओं को तेजी से हल करने के लिए कहा है।

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दिसंबर तिमाही के नतीजों की घोषणा के दौरान, कंपनी ने उल्लेख किया कि उन्हें तत्काल कैंपस हायरिंग की कोई आवश्यकता नहीं दिखती।

इसके बावजूद, कंपनी उद्योग के रुझानों से अलग है, नौकरी में कटौती या किसी भी तरह की कटौती से परहेज करती है, जो अन्य जगहों पर देखी गई है।

Infosys के सीईओ ने दी ये जानकारी

इंफोसिस के सीईओ, सलिल पारेख ने इस बात की जानकारी दी है कि कंपनी किसी भी नौकरी में कटौती की रणनीति को लागू नहीं कर रही है, बल्कि यह अपने कर्मचारियों को एआई और जेनएआई जैसे उभरते तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रतिबद्ध कर रही है।

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इसके अलावा, उन्होंने पुष्टि की कि कंपनी एक प्रतिभाशाली और कुशल वर्कफोर्स के साथ दुनिया भर में बड़े संगठनों को सर्विस देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

पारेख ने ने यह भी कही कि नहीं, हम फ्रेशर्स के साथ ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं। वास्तव में, इंडस्ट्री में अन्य लोगों ने ऐसा किया है, लेकिन हम बहुत स्पष्ट हैं कि हम ऐसा दृष्टिकोण नहीं अपना रहे हैं। मेरा अपना विचार है कि बड़े संगठनों के लिए, सभी तकनीकें एक साथ रहेंगी।

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ये कंपनियां भी कर चुकी हैं ऑनबोर्डिंग में देरी

Accenture, Wipro, HCL Tech, से जुड़े हुए भी ऐसे कई मामले पहले सामने आ चुके हैं। एक मामले में स्टूडेंट को ऑफर लेटर दिया गया था और सभी दस्तावेजों चेक हो गए थे फिर भी ऑनबोर्डिंग डेट नहीं मिली थी।

वहीं, कुछ स्टूडेंस्ट को ऑनबोर्डिंग डेट ज्वाइनिंग से महज दो दिन पहले मिली और बाद में उसे कैंसिल करके आगे बढ़ा दी थी।

एक के बाद एक कई कंपनियों में इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं, जहां फ्रेशर्स का सिलेक्शन तो कर लिया गया, लेकिन उनके ऑनबोर्डिंग को लटकाया जा रहा है। यह भविष्य में जॉब से जुड़ा चिंता का विषय भी बन सकता है।