नयी दिल्ली। अगर आप बढ़ती महंगाई से परेशान हैं तो सावधान हो जाइये, क्योंकि एक और घरेलू चीज के दाम बढ़ने वाले हैं। नये ऊर्जा लेबलिंग मानदंडों, जो जनवरी 2020 से लागू होने जा रहे हैं, से फाइव-स्टार रेफ्रिजरेटर की मैन्युफैक्चरिंग 6,000 रुपये तक महंगी होने की उम्मीद की जा रही है। यह कहना है उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण निर्माता संघ (सीईएएमए) का। नये लेबलिंग दिशानिर्देशों के तहत रेफ्रिजरेटर के 5 स्टार श्रेणी के लिए निर्माताओं को पारंपरिक फोम से वैक्यूम पैनल पर शिफ्ट करना होगा, जिसे रेफ्रिजरेटर इंडस्ट्री के लिए एक चुनौती माना जा रहा है। रेफ्रिजरेटर की मैन्युफैक्चरिंग लागत से बढ़ने से आपको नयी फ्रिंज खरीदने पर 6,000 रुपये ज्यादा अदा करने पड़ेंगे। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) द्वारा रूम एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे कंप्रेसर-आधारित उत्पादों के लिए स्टार रेटिंग लेबल में बदलाव जनवरी 2020 से लागू होगा और फ्रस्ट फ्री तथा डायरेक्ट कूलिंग वन स्टार में बदल रहा है। इस बदलाव के चलते इंडस्ट्री के लिए बाजार में फाइव स्टार लेबल रेफ्रीजिरेटर लाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि जनवरी से ही एनर्जी एफिशिएंसी मानदंडों की टेबल में भी बदलाव होने जा रहा है।
कितने बढ़ेंगे रेफ्रिजरेटर के दाम?
सीईएएमए के अध्यक्ष कमल नंदी का कहना है कि हमें 5 स्टार रेफ्रिजरेटर के लिए एक वैक्यूम पैनल लगाना होगा, जिसके चलते मौजूदा फ्रिज की कीमतों में 5,000-6,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि कोई भी इस राशि का भुगतान नहीं करेगा और मेरे पास भी इस निवेश को अपने प्लांट में लगाने के लिए कोई पैमाना नहीं है, क्योंकि इसके लिए अलग लाइन की जरूरत होती है। यानी इस तकनीक को अपने प्लांट में लगाने के लिए कंपनियों को और निवेश करना होगा। मगर अभी किसी कंपनी के नया निवेश करने की संभावना नहीं है।
कितना है भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामानों का कारोबार?
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का कुल कारोबार 2018-19 में 76,400 करोड़ रुपये का रहा था, जिसके 2024-25 तक 1.48 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। 2018-19 में घरेलू उपकरणों का कारोबार 32,200 करोड़ रुपये का रहा था। एक अंदाजे के मुताबिक रेफ्रिजरेटर का उत्पादतन 2018-19 में 145 लाख इकाइयों की तुलना में 2024-25 तक 275 लाख यूनिट तक बढ़ सकता है।
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