नयी दिल्ली। रिटायरमेंट के बाद पेंशन पर निर्भर रहने वालों के लिए एक अच्छी खबर आई है। असल में बहुत जल्द एक ऐसा पेंशन प्रोडक्ट लॉन्च हो सकता हैं, जिसमें आपको ज्यादा रेगुलर इनकम मिलेगी। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) के चेयरमैन के मुताबिक फ्लोटिंग रेट एन्युटी प्रोडक्ट के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक ग्रुप बनाया गया है। उन्होंने इंश्योरेंस ब्रोकर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईबीएआई) के 17वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ये ऐलान किया। नयी पेंशन स्कीम का सबसे बड़ा फायदा ये है कि मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ने पर पेंशनधारकों को ज्यादा पैसा मिलेगा।

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जी-सेक या मुद्रास्फीति इंडेक्स से होगा लिंक

जब ओवरऑल ब्याज दर गिरती है तो जीवन की सामान्य लागत भी कम हो जाती है और जब ब्याज दर बढ़ती है तो जीवन की लागत भी बढ़ जाती है। आईआरडीएआई एक फ्लोटिंग रेट एन्युटी ऑप्शन शुरू करने की योजना बना रहा है जिसे जी-सेक (सरकारी प्रतिभूतियां) या मुद्रास्फीति इंडेक्स जैसे बेंचमार्क से जोड़ा जा सकता है। इस तरह का प्रोडक्ट काफी बेहतर होगा, क्योंकि बढ़ती महंगाई के कारण रोजमर्रा के जीवन की लागत बढ़ रही है।

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ब्याज दरों में आया है बदलाव

समय के साथ ब्याज दरें बदलती हैं और अक्सर उतार-चढ़ाव के कई चक्रों से गुजरती हैं। अगर देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एफडी ब्याज दरों का उदाहरण लिया जाए तो पिछले दशक के दौरान इनमें बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। एक दशक में बैंक की उच्चतम एफडी ब्याज दर 5.4 फीसदी और 9.25 फीसदी के बीच रही है।

एन्युटी निवेश में कैसा मिलता है रिटर्न

एन्युटी निवेश में फंड लंबी अवधि के लिए और अक्सर जीवन भर के लिए लॉक-इन रहता है। गारंटीड निश्चित आय के लिए, जो 20 से 30 वर्षों तक की लंबी अवधि के लिए भी हो सकती है, जीवन बीमा कंपनियां अक्सर कम ब्याज दर ऑफर करती हैं। ज्यादातर एन्युटी उत्पादों पर दी जाने वाली बेस्ट ब्याज दर 6 फीसदी से भी कम रही है। इसी कारण निवेशक ऐसे उत्पाद खरीदने में रुचि नहीं रखते। यह भारत में एन्युटी उत्पादों को पसंद न किये जाने का एक बड़ा कारण है।

मुद्रास्फीति इंडेक्स लिंक्ड पेंशन प्रोडक्ट आएगा काम

मुद्रास्फीति इंडेक्स से लिंक हुआ पेंशन प्रोडक्ट मदद करेगा। बाजार दर के आधार पर फ्लेक्सिबल पेंशन प्रतिबद्धता से बीमाकर्ता निवेशकों को उच्च ब्याज दर ऑफर कर सकेंगे। फ्लोटिंग रेट एन्युइटी प्रोडक्ट, जो जी-सेक या सीपीआई जैसे इंडेक्स से जुड़ा होता है, जब भी मुद्रास्फीति बढ़ेगी आपके हाथ में नियमित आय के रूप में ज्यादा पैसा आएगा।

निवेशकों को होता है नुकसान

ऐसे कई मौके आते हैं जब अर्थव्यवस्था में ब्याज दर इस स्तर तक बढ़ जाती है कि फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट की सामान्य ब्याज दर और एन्युटी रेट के बीच अंतर बहुत अधिक हो जाता है। हालांकि जब अर्थव्यवस्था में सामान्य ब्याज दर अधिक होताी है तो एन्युटी की निश्चित और कम ब्याज दर से निवेशकों के लिए बढ़ी हुई महंगाई की भरपाई नहीं हो पाती। मगर नयी पेंशन स्कीम में ऐसे समय पर ब्याज दर बढ़ेगी और महंगाई में बढ़ोतरी की भरपाई हो सकेगी।