Inflation based on Wholesale Price Index declined in May: देश के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति मई में अब तक के सबसे निचले स्तर 3.48 प्रतिशत के निगेटिव पर आ गई है। खनिज तेल, धातु, खाद्य उत्पाद, कपड़ा, गैर-खाद्य सामान, कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और रासायनिक उत्पाद की कीमतों में गिरावट के कारण ऐसा हुआ है।

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वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, मई के लिए थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति हाल के समय में सबसे कम है।

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अप्रैल में यह निगेटिव 0.92 प्रतिशत थी, वहीं मार्च में यह प्राथमिक वस्तुओं, निर्मित उत्पादों, ईंधन और बिजली के साथ-साथ भोजन के सूचकांक में भारी गिरावट के कारण गिरकर 29 महीने के निचले स्तर 1.34 प्रतिशत पर आ गई थी।

फरवरी में थोक महंगाई दर 3.85 फीसदी थी, जबकि जनवरी में यह 4.73 फीसदी थी। फरवरी की डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 3.85 फीसदी थी, जो दो साल के निचले स्तर पर थी। जनवरी 2021 में थोक महंगाई दर गिरकर 2.51 फीसदी पर आ गई थी।

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वहीं इसस पहले अप्रैल के मुकाबले मई में खदरा महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई थी। मई 2023 में खुदरा महंगाई दर घटकर 3.25 फीसदी पहुंच गई है, जो अप्रैल में 4.70 फीसदी थी। वहीं खुदरा महंगाई दर पिछले साल मई 2022 में 7.04 फीसदी थी। खाने पीने की चीजों के साथ-साथ फल, सब्जियों की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। मार्च, 2023 में खुदरा महंगाई दर 5.66 फीसदी थी। 2 साल बाद महंगाई सबसे निचले स्तर पर आई है।

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इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, साथ ही अर्थव्यवस्था के लिए भी अच्छी है। महंगाई का सीधा असर खरीदारी पर होता है। मान लीजिए अगर महंगाई दर 6 फीसदी है, तो आपके 100 का मूल्य 94 रुपये रह जाता है। महंगाई कम होने पर आम लोग निवेश भी अच्छे से करते हैं, और खरीदारी भी जमकर करते हैं।

सरकार की ओर से खुदरा महंगाई के ये आंकड़े 1114 शहरी और 1181 ग्रामीण बाजारों से जुटाए गए डेटा के आधार पर जारी किए जाते हैं। इसके तहत देश के 98.56 प्रतिशत गांवों को जबकि 97.04 प्रतिशत शहरी बाजारों को कवर किया जाता है।

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