IndusInd Bank: शेयर बाजार के एक्शन में इन दिनों इंडसइंड बैंक का शेयर फोकस में है. लगातार शेयरों में तेज करेक्शन देखने को मिल रहा. बाजार में बैंक को लेकर तरह-तरह की निगेटिव खबरें चल रही हैं. इसके चलते बैंक के जमाकर्ताओं के बीच अपने जमा रकम की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. क्योंकि पिछले साल बैंक के सीईओ और डिप्टी सीईओ की ओर अपने शेयरों के बेचने की खबर सामने आई है. इसके अलावा बैंक के लीडरशिप के साथ रेगुलेटरी असंतोष के बारे में कमेंट ने भी बेचैनी को और बढ़ा दिया है.
बीते हफ्ते जारी की थी सफाई
10 मार्च को इंडसइंड बैंक ने अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में दिक्कतों को लेकर सफाई पेश की थी. दरअसल, ये विसंगतियां बैंक की कुल संपत्ति का 2.35% है, जो 1,500-2,000 करोड़ रुपए के बराबर है. ऐसे में सवाल उठता है कि नियमित ऑडिट के दौरान इतने बड़े अंतर को कैसे अनदेखा किया गया.
रेगुलेटरी जांच और मैनेजमेंट की टेंशन
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अन्यत्र इसी तरह की समस्याओं को रोकने के लिए बैंकों की डेरिवेटिव बुक की गहन जांच शुरू कर दी है. एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) भी इस मामले में प्रारंभिक जांच कर सकता है. ये कार्रवाई RBI की ओर से बैंक के सीईओ सुमंत कठपालिया को एक साल का विस्तार दिए जाने के बाद की गई है, जबकि बोर्ड ने तीन साल के लिए अनुरोध किया था.
कठपालिया ने माना कि बैंकिंग रेगुलेटर उनकी लीडरशिप क्षमता से असहज है. नतीजतन, बोर्ड को उनके लिए संभावित उत्तराधिकारी की पहचान करनी चाहिए. इस बीच सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं की भरमार है, जिससे डिपॉजिटर्स के लिए मामला और भी जटिल हो गया है.
बैंक के लिए बढ़ेगी टेंशन!
इन चुनौतियों के बावजूद इंडसइंड बैंक वित्तीय रूप से स्थिर बना हुआ है. 31 दिसंबर तक इसकी डिपॉजिट रकम 4.09 लाख करोड़ रुपए थी, जबकि कर्ज राशि 3.66 लाख करोड़ रुपए थी. ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी GNPA रेश्यो 2.25% था, जो प्रबंधनीय है और जमाकर्ताओं के लिए चिंताजनक नहीं है.
बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 16.46% था, जो विनियामक न्यूनतम 11.5% से काफी ऊपर था. यह वित्तीय तनाव को झेलने और भविष्य की वृद्धि का समर्थन करने की इसकी क्षमता को दर्शाता है. ऐतिहासिक रूप से देश में किसी भी शेड्यूल कमर्शियल बैंक को RBI की ओर से बंद नहीं किया गया है.
डिपॉजिटर्स की सेफ्टी में RBI की भूमिका
अगर RBI को डिपॉजिटिर्स के हितों पर कोई खतरा महसूस होता है, तो वह बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत बचाव योजनाओं को तुरंत लागू कर सकता है. पिछले उदाहरणों में 2019 में लक्ष्मी विलास बैंक और 2020 में यस बैंक को डिपॉजिटर्स के धन को प्रभावित किए बिना बचाना शामिल है.
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