देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों गंभीर मुश्किलों से गुजर रही है। फ्लाइट कैंसिलेशन, क्रू की कमी और DGCA की सख्ती ने कंपनी की हालत और भी बिगाड़ दी है। इसका सीधा असर इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के मार्केट कैप और उसके मालिक राहुल भाटिया की नेटवर्थ पर पड़ रहा है। लगातार गिरते शेयरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

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लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन से बढ़ी दिक्कत

पिछले कई दिनों से इंडिगो की बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं। यात्रियों को एयरपोर्ट पर घंटे-घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। इसका असर ब्रांड इमेज और कंपनी की कमाई पर साफ दिख रहा है। DGCA ने भी स्थिति को देखते हुए इंडिगो को अपने 10% फ्लाइट शेड्यूल में कटौती करने का आदेश दिया है। यह फैसला एयरलाइन के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है क्योंकि इससे ऑपरेशनल क्षमता और रेवेन्यू दोनों पर असर पड़ेगा।

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मार्केट कैप में 5 अरब डॉलर की भारी गिरावट

इंटरग्लोब एविएशन के शेयर पिछले 10 ट्रेडिंग दिनों में से आठ दिन टूटकर बंद हुए। लगातार हो रही गिरावट की वजह से कंपनी का मार्केट कैप लगभग 5 अरब डॉलर कम हो गया है। 10 दिसंबर को भी, थोड़ी रिकवरी के बाद शेयर दोबारा भारी गिरावट में बंद हुए। निवेशकों में डर बढ़ गया है और वे शेयर बेचने लगे हैं।

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राहुल भाटिया की नेटवर्थ पर भी पड़ा जोरदार असर

इंडिगो के फाउंडर और सबसे बड़े प्रमोटर राहुल भाटिया की संपत्ति भी ढह गई है। कुछ महीनों पहले उनकी नेटवर्थ 11 अरब डॉलर से ऊपर थी, लेकिन मौजूदा संकट के चलते यह घटकर सिर्फ 9.1 अरब डॉलर रह गई है।

यह छह महीने में सबसे बड़ा बदलाव है।

उनकी कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा इंटरग्लोब एविएशन की हिस्सेदारी से जुड़ा है, इसलिए शेयर गिरने का सीधा असर उनकी नेटवर्थ पर पड़ा है।

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ब्रोकरेज फर्मों की चेतावनी इंडिगो पर बढ़ रहा दबाव

कई बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों ने इंडिगो को लेकर चिंता जताई है। जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो का "लो-कॉस्ट और हाई-यूटिलाइजेशन मॉडल" नए पायलट रेस्ट नियमों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा पायलटों और क्रू की बढ़ी सैलरी, रुपए में गिरावट से बढ़ा विदेशी खर्च और लगातार फ्लाइट देरी की वजह से मुआवजा देने का दबाव कंपनी की वित्तीय स्थिति को और कमजोर कर रहा है।

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Moody's ने भी जताई चिंता

रेटिंग एजेंसी Moody's ने लगातार उड़ानों के रद्द होने को एयरलाइन के लिए "क्रेडिट नेगेटिव" बताया है। उनका कहना है कि रिफंड और मुआवजे की भरपाई में कंपनी की कमाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही DGCA की आगे आने वाली पेनल्टी का खतरा भी मंडरा रहा है।