सोमवार, 3 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार की क्लोजिंग बिल्कुल अलग अंदाज में हुई। नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के पहले ही दिन इंडेक्स और बड़े शेयरों में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। अब फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग दोपहर 3:40 बजे तक होती है, ताकि इसे ऑक्शन के समय के साथ सिंक किया जा सके। रिटेल निवेशकों ने सोशल मीडिया पर आखिरी पलों में आए बड़े उछाल और अलग-अलग एक्सचेंजों के बीच कीमतों के अंतर (gaps) पर चिंता जताई है।

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अब CAS का समय दोपहर 3:15 से 3:35 बजे तक तय किया गया है। इसमें 3:00 से 3:15 बजे के बीच कैश ट्रेडिंग के वेटेड एवरेज को रेफरेंस प्राइस माना जाता है। इस दौरान इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस, वॉल्यूम और बाय-सेल इम्बैलेंस का डेटा लगातार ब्रॉडकास्ट होता रहता है। आखिरी दो मिनटों में रैंडम क्लोजिंग होती है। इसमें प्लस-माइनस 3% का बैंड लागू होता है और मैचिंग के समय मार्केट ऑर्डर्स को प्राथमिकता दी जाती है।

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CAS के पहले दिन की उथल-पुथल और आज के प्री-ओपन का हाल

पहले दिन क्लोजिंग के वक्त बड़े उतार-चढ़ाव और इम्बैलेंस देखने को मिले, खासकर उन शेयरों में जहां लिक्विडिटी कम थी। ट्रेडर्स ने ऑक्शन के दौरान अचानक आई तेजी और एक्सचेंजों के बीच कीमतों के अंतर की शिकायत की। चूंकि NSE और BSE अपने ऑक्शन अलग-अलग चलाते हैं, इसलिए उनकी आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस में अंतर हो सकता है। आज के प्री-ओपन सेशन में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ज्यादा निवेशक इसमें शामिल होते हैं और एल्गोरिदम के दोबारा सेट होने के बाद ये विसंगतियां दूर होती हैं या नहीं।

आज की वॉचलिस्ट: बैंकिंग, PSU एनर्जी और हाई-बीटा मिडकैप शेयरों पर रखें नजर

इंडेक्स में भारी वजन और ऑक्शन के प्रति संवेदनशीलता के कारण बैंकों पर खास ध्यान दें। PSU एनर्जी शेयरों में पॉलिसी और प्रोग्राम फ्लो के चलते हलचल दिख सकती है। कम लिक्विडिटी वाले हाई-बीटा मिडकैप शेयरों में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। दोपहर 3:15 से 3:35 के बीच इंडिकेटिव प्राइस, वॉल्यूम और इम्बैलेंस मीटर को ट्रैक करें। इसके बाद 3:40 तक डेरिवेटिव्स में ओपन इंटरेस्ट और स्प्रेड में होने वाले बदलावों पर नजर रखें।

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3:15–3:35 का CAS और 3:40 तक F&O ट्रेडिंग: कैसे बनाएं रणनीति?

आखिरी पलों में मार्केट ऑर्डर्स के जरिए कीमतों के पीछे न भागें। इसके बजाय लिमिट ऑर्डर्स और अनुशासित आफ्टर मार्केट ऑर्डर्स (AMO) का इस्तेमाल करें। ब्रैकेट ऑर्डर्स को एक बार जरूर चेक कर लें ताकि ऑक्शन के दौरान गलत भाव पर ट्रेड न हो जाए। 3% के बैंड को ध्यान में रखकर चलें। 3:15 से अगले दिन की ओपनिंग के बीच स्लिपेज और गैप का रिस्क बना रहता है। 3:40 तक अपनी हेजिंग को सही रखें और फिर नेट एसेट वैल्यू (NAV) व रिस्क का मिलान करें। चूंकि इंडेक्स और NAV ऑक्शन क्लोज पर आधारित होते हैं, इसलिए अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।